शंखनाद प्रतियोगिता में कक्षा तीसरी से बारहवीं तक के विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा प्राचार्य निवेदिता सरकार ने बताया शंखनाद का सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक महत्व…
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़] नवरात्र के पावन पर्व पर ड्रीमलैंड हायर सेकेंडरी स्कूल में परंपरा, संस्कृति और सकारात्मक ऊर्जा का अनूठा संगम देखने को मिला। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी नवरात्र के प्रथम दिन विद्यालय में शंखनाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कक्षा तीसरी से बारहवीं तक के विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और आत्मविश्वास के साथ प्रतियोगिता में भाग लिया। शंखनाद की गूंज से विद्यालय परिसर भक्तिमय हो उठा और वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ।
प्रतियोगिता को विद्यार्थियों की कक्षाओं के अनुसार तीन वर्गों में विभाजित किया गया था। तीनों वर्गों में विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा, एकाग्रता और शंखनाद करने की क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया।
छोटे बच्चों ने शंखनाद से बिखेरी सकारात्मक ऊर्जा-:

कक्षा तीसरी से पांचवीं तक के विद्यार्थियों ने प्रतियोगिता में उत्साहपूर्वक भाग लिया। नन्हे प्रतिभागियों ने शंखनाद की गूंज से सभी का मन मोह लिया। इस वर्ग में कक्षा पांचवीं के अपूर्व विश्वास ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। कक्षा पांचवीं की गीतिका धुरी और कक्षा चौथी के आदर्श मिश्रा ने द्वितीय स्थान हासिल किया। वहीं, कक्षा चौथी की प्रिशा कुमारी यादव और कक्षा तीसरी के अक्षत तिवारी ने तृतीय स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
मध्य वर्ग में विद्यार्थियों ने दिखाया दमखम:-

कक्षा छठवीं से आठवीं तक के विद्यार्थियों ने भी पूरे जोश और उमंग के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। इस वर्ग में कक्षा छठवीं के यीशु प्रसाद कुशवाहा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। कक्षा छठवीं के श्री देव, लक्ष्य गंधर्व और कक्षा आठवीं के अंकुर दुबे ने द्वितीय स्थान हासिल किया। कक्षा छठवीं के श्रेयांश सोनी, आकाशी शास्त्री और कक्षा सातवीं के नमन सिंह ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं, कक्षा छठवीं के प्रतीक राठौर को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।

वरिष्ठ वर्ग में ओमी कुंभकार ने मारी बाजी
कक्षा नौवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों के बीच भी कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। इस वर्ग में कक्षा बारहवीं के ओमी कुंभकार ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। कक्षा नौवीं के अंकित मिश्रा द्वितीय और कक्षा ग्यारहवीं के नित्य वीर सिंह ठाकुर तृतीय स्थान पर रहे।
प्राचार्य ने समझाया शंखनाद का सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व-:

विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती निवेदिता सरकार ने विद्यार्थियों को शंखनाद की धार्मिक, सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक महत्ता से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि भारतीय परंपरा में शंखनाद को शुभता और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण के शंख का नाम ‘पाञ्चजन्य’ है। वहीं, धार्मिक मान्यताओं में शंख को माता लक्ष्मी का भाई भी कहा जाता है।
उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित रूप से शंख बजाने के अभ्यास के लिए प्रेरित करते हुए बताया कि सही तकनीक और सावधानी के साथ शंख बजाने से श्वसन संबंधी मांसपेशियों के अभ्यास में मदद मिल सकती है। इस प्रकार ऐसी प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति से जोड़ने के साथ उनके आत्मविश्वास और एकाग्रता को भी बढ़ावा देती हैं।
निर्णायकों की भूमिका रही महत्वपूर्ण:-
प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती निवेदिता सरकार, रूबी चक्रवर्ती एवं लक्ष्मणेंद्र सर शामिल रहे। कार्यक्रम का मंच संचालन श्रीमती आशा पवार ने किया।
शंखनाद प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना को प्रोत्साहित किया। विद्यालय परिसर में गूंजती शंखध्वनि ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक और उल्लासपूर्ण बना दिया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि शिक्षा के साथ सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण भी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

