मरीजों को किसी एक मेडिकल स्टोर से दवा लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, अस्पतालों के मेडिकल स्टोर्स में मिला सूचना बोर्ड..!
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़] जिले में औषधि प्रशासन द्वारा नियमित औषधि विक्रय संस्थानों की जांच का अभियान लगातार जारी है। इसी कड़ी में 13 अक्टूबर 2026 को सहायक औषधि नियंत्रक भीष्म देव सिंह तथा औषधि निरीक्षक सुनील पंडा एवं सोनम जैन द्वारा जिले के दो अस्पतालों में संचालित मेडिकल स्टोर्स सहित पांच अन्य मेडिकल स्टोर्स की सघन जांच की गई। इसके साथ ही बृहस्पति बाजार, पोस्ट ऑफिस रोड स्थित साईं ब्लड सेंटर का भी निरीक्षण किया गया।

एंटीबायोटिक और नारकोटिक्स दवाओं के रिकॉर्ड की जांच-:
औषधि प्रशासन की टीम ने रिंग रोड, तिलक नगर एवं व्यापार विहार स्थित मेडिकल स्टोर्स का निरीक्षण किया। इस दौरान एंटीबायोटिक, नारकोटिक्स एवं मेडिकल टर्मिनेशन किट्स के क्रय-विक्रय से संबंधित दस्तावेजों का अवलोकन किया गया, ताकि दवाओं के विक्रय में निर्धारित नियमों के पालन की जांच की जा सके।

मरीजों को किसी खास मेडिकल स्टोर से दवा लेने की बाध्यता नहीं-:
जांच के दौरान नोबेल अस्पताल एवं समन्वय अस्पताल, रिंग रोड स्थित मेडिकल स्टोर्स में सूचना बोर्ड लगा पाया गया। बोर्ड पर स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि “मरीजों को दवा इसी मेडिकल स्टोर से लेना अनिवार्य नहीं है।”
मरीजों को अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने तथा इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन की स्थिति का जायजा लेने के उद्देश्य से जांच की गई।

साईं ब्लड सेंटर में रक्त की उपलब्धता एवं व्यवस्थाओं का निरीक्षण-:
औषधि प्रशासन की टीम ने बृहस्पति बाजार, पोस्ट ऑफिस रोड स्थित साईं ब्लड सेंटर का भी निरीक्षण किया। इस दौरान रक्त के उचित रखरखाव, मरीजों को निर्धारित एवं उचित मूल्य पर रक्त की उपलब्धता, तकनीकी स्टाफ की उपस्थिति तथा संबंधित नियमों के पालन की जांच की गई।
निरीक्षण के दौरान तकनीकी स्टाफ उपस्थित पाया गया तथा निर्धारित नियमों का पालन होता मिला।

जनहित में जारी रहेगा निरीक्षण अभियान-:
औषधि प्रशासन द्वारा मेडिकल स्टोर्स में दवाओं के क्रय-विक्रय से संबंधित रिकॉर्ड की जांच, नियमों के पालन तथा मरीजों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण अभियान जारी है। इसका उद्देश्य दवा विक्रय व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना और मरीजों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है।

