05-जून,2021
रायपुर-{जनहित न्यूज़}
साहित्यकार, समाजसेवी और पर्यावरण हितैषी श्रीमती
उर्मिला देवी {उर्मि} ने पर्यावरण दिवस पर एक कविता के रूप में पूरे देश के नाम संदेश प्रेषित किया है जो कि सचमुच ही सराहनीय है और हम सभी को इस कविता का सार समझते हुए पर्यावरण की रक्षा करना चाहिए क्योंकि ये मानव जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है और यदि अब भी हम पर्यावरण की महत्वता नही समझे तो फिर कब समझेंगे…
धरती की पुकार
सुनो कभी तो ध्यान लगाकर ,
धरती की ये करुण पुकार ।
मेरी ही संतान यह मानव ,
मुझ पर कैसा करें उपकार ।
क्यूं विकास की अंधी दौड़ मे,
यह विनाश को बुलाता जाय ।
खुद के प्राण संकट में डाले,
मेरी देह को छीलता जाय ।
बेजुबान पौधों को अकारण,
क्यों यह निर्दयी काटे जाय।
नदी, कूप और कई जलाशय,
क्यों हर दिन यह रहा सुखाय ।
अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी,
क्यों यह नित प्रति रहा चलाय ।
हवा पानी और हरियाली बिन,
कहां है जीवन कोई समझाय ।
सुंदर वनों को काट काट कर,
भरे तिजोरी नर, खुश हुआ जाय ।
इस नासमझी से अब नर को,
कौन उबारे, कौन बचाय ।
पैसे खाकर , रुपए पीकर , कोई जी सका हो तो बतलाय ।
पर्यावरण की रक्षा में अब,
कोई समझ कर आगे आय ।
मानव जाति की रक्षा हेतु,
मेरा जीवन कोई तो बचाय ।
सुनो कभी तो ध्यान लगाकर ,
धरती रो कर, गुहार लगाय ।


