मैनपाट में 1 हजार से अधिक मांझी परिवारों के मकानों के निर्माण कार्य 2 साल से अधूरे
कड़ाके की ठंड में तिरपाल लगाकर रहने को मजबूर परिवार !
09-जून,2021
मैनपाट-{जनहित न्यूज़}
छत्तीसगढ़ का छोटा शिमला कहे जाने वाले मैनपाट ब्लाॅक में मांझी आदिवासियों के नाम पर प्रधानमंत्री आवास योजना पर मकान स्वीकृत हुए और उनके खातों में योजना के तहत पहली और दूसरी किस्त भेजी गई, इसकी जानकारी मिलते ही दलाल सक्रिय हो गए और बरिमा पंचायत के कई हितग्राहियों के खातों से पैसा निकालकर हड़प लिया गया और अब इस कड़कड़ाती ठंड में मांझी जनजाति के लोग निर्माण पूरा नहीं होने से अधूरे मकानों में ही रह रहे हैं। इसके बाद भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। अब इस पर यहां के सरपंच देवसाय कह रहे हैं कि हितग्राही के खाते से 90 हजार निकाला था और उसे पंचायत में पुलिया और सड़क स्वीकृत कराने जिला पंचायत में कमीशन दे दिया। मैनपाट के ब्लॉक मुख्यालय के 2 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत बरीमा के बरडांडपारा, पकड़ीपारा, माझा पारा में बुजुर्ग करू राम एवं उसके बेटे धनसाय मांझी के नाम पर स्वीकृत प्रधानमंत्री आवास दो साल पहले स्वीकृत हुआ।
उनका कहना है कि गांव के सरपंच व आवास मित्र ने उनके बैंक खाते से 90 हजार और 55 हजार की राशि अपने खाते में ट्रांसफर कराकर हड़प ली है। मैनपाट में 1 हजार से अधिक मांझी परिवार के मकान 2 साल से अधूरे हैं।
खुलासे के बाद भी दलालों पर नहीं की गई कार्रवाई
पड़ताल में पता चला कि दलाल जनपद कार्यालय से सबसे पहले उन लोगों की लिस्ट लेते हैं जिनका मकान पास हुआ होता है, फिर हितग्राहियों को मकान बनवाने का झांसा देते हैं। इसके बाद पैसा अपने खाते में ट्रांसफर कर में निकलवा लेते हैं और फिर निर्माण सामग्री देने के नाम पर घुमाते हैं। यही वजह है कि कई असाक्षर लोगों के नाम पर मकान निर्माण के नाम पर राशि पास हुई और उनके पैसे हड़प लिए गए। यहां दलालों ने जनपद के कर्मचारियों से मिलीभगत कर हितग्राहियों का बैंक खाता नंबर को बदलकर अपने लोगों के खातों में पैसा डलवा लिया है।
इसका खुलासा भी हुआ, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
जिपं सदस्य को दिए रुपए
बरिमा के सरपंच देवसाय का कहना है कि हितग्राही के खाते से पैसे निकाला था पर उस पैसे को जिला पंचायत सदस्य को काम पास करवाने के लिए कमीशन के नाम पर दे दिया सोचा था जब काम पास हो जाएगा और पहली किस्त निर्माण कार्य के लिए मिलेगी उससे उसका मकान बन जाएगा, लेकिन अब जिला पंचायत सदस्य से बात करता हूं…
लिपिक ने समन्वयक की आईडी लेकर की गड़बड़ी
मैनपाट के कोट पंचायत में सबसे अधिक मकान स्वीकृत हुए है। जहां कई मृत लोगों के नाम पर मकान निर्माण के नाम और राशि पास की गई है और दूसरे लोगों के खाते में पैसा भेज दिया गया। मकान भी नहीं बना
बताया जा रहा कि पीएम आवास के ब्लाॅक समन्वयक की आईडी लेकर एक कम्प्यूटर ऑपरेटर ने गड़बड़ी की हालांकि अब ऑपरेटर को ऊंची राजनीतिक पहुंच के कारण जनपद में लिपिक बना दिया गया है। उसकी नौकरी ही जांच के दायरे में है, लेकिन फिर भी अफसर उसे बचा रहे हैं। जनपद के कर्मचारियों का कहना है कि योजना में गड़बड़ी पर जांच के लिए राज्य स्तर की एक टीम भी आई लेकिन उसमें उस लिपिक को बचाया गया और समन्वयक के खिलाफ जांच हुई।
गड़बड़ी की जांच चल रही
जिला पंचायत सीईओ विनय लांघे का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास निर्माण में इस तरह की गड़बड़ी हुई है, पता चला है, राज्य स्तर की टीम ने जांच की है, फिलहाल मैं आउट आफ स्टेट हूं, वापस आने के बाद जांच और गड़बड़ी किस तरह की हुई है देखता हूँ, जो भी दोषी होगा उस पर कड़ी कार्रवाई होगी।
सरकार बदली, लेकिन दलालों की कमीशनखोरी अब भी जारी है
सरपंच का यह कहना कि उसने हितग्राही के खाते से पैसा निकालकर काम पास कराने के लिए जिला पंचायत में दिया। सरपंच का यह खुलासा बताता है कि सालों से ग्राम पंचायतों में विकास कार्य कराने के नाम पर राजनीतिक और अफसरों के बीच कमीशनखोरी का खेल बंद नहीं हुआ है और सरपंचों के पास इतना पैसा नहीं होता है कि वे काम पास कराने, काम पास होने के बाद उसके मूल्यांकन के लिए एसडीओ, इंजीनियर सहित अफसरों को कमीशन दें सकें। तीन साल पहले पूर्व सीएम रमन सिंह ने कमीशन के खिलाफ बात की थी और इसके दुष्परिणाम बताए थे। उनकी सत्ता चली गई, सरपंच के इस खुलासे के बाद वर्तमान सरकार को भी अपनी बेहतरी के लिए कमीशनखोरी पर समय से लगाम लगा लेना चाहिए, ताकि पंचायत स्तर तक सरकार की एक अच्छी छवि उभर कर आये।


