ले तो आए हो हमे सपनो के गॉंव में प्यार की छाँव में बिठाए रखना…
26-अगस्त 2021
रायपुर-{जनहित न्यूज़} (साकेत स्वामी) रायपुर। छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार के मुखिया भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के बीच कश्मकश की खबरों के बीच दोनों को दिल्ली दरबार में बुलाकर सुलह की जो गुंजाइश तलाशी गई है, मौजूदा वक्त में इससे बेहतर विकल्प कुछ और हो ही नहीं सकता। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस मामले को बड़े युक्तिसंगत तरीके से सुलझाने की कोशिश की है। कांग्रेस उम्मीद कर सकती है कि अंदरूनी तकरार की खबरों पर इससे विराम लगेगा। राहुल गांधी के साथ श्री बघेल और श्री सिंहदेव की बैठक के बाद कांग्रेस के छत्तीसगढ़ प्रभारी श्री पुनिया ने स्पष्ट कर दिया है कि वैसी कोई स्थिति नहीं है, जैसी कि खबरें उड़ती रहती हैं। यह स्पष्ट संकेत नहीं, बल्कि खुली उद्घोषणा समझी जानी चाहिए कि छत्तीसगढ़ में नेतृत्व बंटवारे का कोई फॉर्मूला न तो था, न है और न ही होगा। यह केवल परिकल्पना है, जिसका कोई आधार नहीं है। जब जन्मोत्सव के बीच श्री बघेल दिल्ली गए तो तरह तरह की अटकलें खबरों के आकाश में उड़ने लगी थीं लेकिन दिल्ली बैठक के बाद इनका पटाक्षेप हो गया। यह तो होना ही था। लोकतंत्र में जनता ही वर होती है और सत्ता वधू होती है। जनता के मन जो भाये, वही सही। दुल्हन वही जो पिया मन भाये..! वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में जनता ने भूपेश बघेल के संगठन नेतृत्व में कांग्रेस को एकतरफा चुना। तब तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव सहित सभी कांग्रेसी नेताओं से लेकर सामान्य कार्यकर्ता तक हर किसी ने सत्ता हासिल करने जी तोड़ मेहनत की। सफलता का मंत्र एकता है। यही एकता अगले चुनाव के लिए भी अपेक्षित है। खबर है कि शिखर नेतृत्व ने यही सुझाव दिया है कि मिलकर अगले चुनाव की तैयारी की जाय। जो वादे पूरे नहीं हो सके हैं, उन्हें पूरा करने पर ध्यान केंद्रित किया जाय। जहां तक भूपेश बघेल के नेतृत्व का सवाल है तो उन्होंने सत्ता का नेतृत्व सम्हालते ही राज्य और कांग्रेस को मजबूती देने कोई कसर बाकी नहीं रखी। वे आज अब तक के कार्यों और नीतियों के आधार पर बेहद लोकप्रिय मुख्यमंत्री के रूप में देखे जा रहे हैं। उनकी व्यावहारिक जमीनी नीतियों ने जनता और सत्ता के बीच की दूरी मिटा दी है। वे किसान से लेकर मजदूर और आम जन से लेकर पशु धन तक हर मामले में पर्याप्त संवेदनशील हैं। इसलिए उनकी लोकप्रियता का दायरा निरंतर बढ़ रहा है। वे जिस समान्य शैली में एक कुशल प्रशासक की भूमिका निभा रहे हैं, वह कांग्रेस को जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने में सहयोगी साबित हो रही है। जब जनता के प्रति सत्ता सरल और सहज हो तो स्वाभाविक तौर पर एकात्म स्थापित हो जाता है। एक मुख्यमंत्री के रूप में राज्य के हितों के लिए विपरीत परिस्थितियों में कैसे जूझा जाता है, यह भूपेश बघेल ने जाहिर किया है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व किन्हीं भी असहज स्थिति को उत्पन्न कैसे होने दे सकता है, यह सीधी सी बात सहज ही समझी जा सकती है। कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व की ओर से राहुल गांधी ने इस मामले को जिस संजीदगी से सुलझाने का प्रयास किया, उससे अब कथित आंतरिक खींचतान समाप्त हो, इसके लिए समन्वय और सौहार्द की जरूरत है।

