दाऊ जी ध्यान दे मनरेगा की राशि से आंगन सजा रहा जिला पंचायत अध्यक्ष !
निजी जमीन में करवा लिए11 लाख के निर्माण कार्य !
18 नवंबर 2021
बिलासपुर-{जनहित न्यूज़} बिलासपुर
एक तरफ कांग्रेस गांव-गरीब की हर समस्यायों पर निरंतर कार्य करने की का तान तंबोला पीटती रहती है, वही दूसरी तरफ उन्ही की सत्ता में काबिज कुछेक जनप्रतिनिधि दाऊ जी की मंशा पर महज स्वयं सुख की खातिर सरकारी योजनाओं का किस तरह दुरुपयोग कर रही है ये सब देख कर तो आने वाले समय मे लुटिया पूरी तरह डूबती नजर आ रही है और यदि इस तरह के कार्यकलापों पर शीघ्र ही लगाम नहीं कसी गई तो आने वाली परिस्थितियां कांग्रेसी सरकार के लिए अनुकूल नहीं होंगी अब यहां सोचनीय विषय यह है कि आखिर भूपेश सरकार पर पनौती लगाने का काम कौन और कहां कर रहा है।
यदि इस विषय पर एक नजर डालें तो हाल ही में एक मामला सामने आया जोकि बेहद गंभीर और चिंताजनक है क्योंकि जनप्रतिनिधि जनसेवा के लिए होता है और उसे जनता ही चुनकर अपना मुखिया बनाती है तथा शासकीय योजनाओं को जन-जन
तक पहुंचाने का एक माध्यम होता है और यदि वही शासकीय योजनाओं को जनप्रतिनिधि अपने हित में और अपनी सुविधाओं के लिए खर्च करता है तो यह बेहद निंदनीय कृत्य है।
महात्मा गांधी जी नाम की योजना का जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण चौहान कैसे पलीता लगा रहे है काश वे आज देख पाते…
मनरेगा के 11 लाख रुपए से अपने निजी जमीन की सुविधा के लिए उनके काम पर यदि कुछ नजर फिरा ली जाए तो बेहद की चिंता का विषय है क्योंकि किसी विशेष पद पर असीत कोई जनप्रतिनिधि द्वारा इस तरह शासकीय योजनाओं पर स्वायहित लाभ के लिए गरीब जनता का शोषण एक अपराध की श्रेणी में आता है।
बिलासपुर के जिला पंचायत अध्यक्ष
अरुण चौहान जो महात्मा गांधी के नाम से शुरू की गईं योजना मनरेगा को ही चूना लगा रहे है । उन्होंने मनरेगा के 11 लाख रुपए अपने निजी जमीन के विकास करने में लगा दिए! मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस की भद्र पिटवाने में अरुण चौहान ने कोई कसर नहीं छोड़ी!
एक तो बड़ी मुश्किल से सालों बाद जिला पंचायत में कांग्रेस की सत्ता आई उसे बनाए रखने के बजाय जिला पंचायत अध्यक्ष 5 साल के कार्यकाल में ही कांग्रेस को रसातल में पहुंचाने का लगता है पूरा इंतजाम कर दिए है। सरकारी योजनाओं की राशि से अपना निजी स्वार्थ साधने की हरकत से कांग्रेस की और प्रदेश सरकार की छवि खराब करने वाले जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण चौहान के खिलाफ पार्टी क्या कारवाई करेगी यह तो पता नही लेकिन जिला प्रशासन और जिला पंचायत को निश्चित ही वसूली की कार्रवाई के साथ ही एफ आई आर भी करानी चाहिए।
सत्ता की मद में चूर निर्वाचित जनप्रतिनिधि शासकीय योजनाओं में किस तरह पलीता लगा रहे है यह जिला पंचायत अध्यक्ष के गृह ग्राम में मिल जायेगा।
जहां जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण चौहान ने मनरेगा योजना की राशि से अपने निजी जमीन में 11 लाख रुपए के निर्माण कार्य करवा लिए। यह कृत्य अपराधिक माना जा सकता है। जांच पश्चात राशि वसूली के साथ ही एफ आई आर भी होनी चाहिए। सरकारी योजनाओं की राशि निजी कार्यों में खर्च करने वाले जनप्रतिनिधियों में एक नया नाम बिलासपुर जिला पंचायत अध्यक्ष का भी जुड़ गया है । उन्होंने महात्मा गांधी रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) के नियमों की न केवल धज्जियां उड़ाई साथ ही पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 40 को भी धत्ता दिखा दिया, साथ ही एक्ट के अधिनियम 2005 के प्रावधानों को भी धत्ता दिखा दिया। अधिनियम कहता है कि इस एक्ट के तहत काम सिर्फ शासकीय भवन पर होगा ।
अब जानते हैं कि आखिर जिला पंचायत अध्यक्ष बिलासपुर ने 11 लाख रुपए का कैसे दुरूपयोग किया। मई 2020 ग्राम पंचायत भरारी जनपद पंचायत तखतपुर में अध्यक्ष अरुण सिंह चौहान का फॉर्म हाउस है इस पर जाने के लिए 11 लाख रुपए मिटटी, मुरम रोड और एक स्लेब कलवर्ट का निर्माण मनरेगा के तहत हुआ यह काम तब हुआ जब 5 साल पूर्व ही मुरूम रोड निर्माण पर प्रतिबंध लग चुका है। नियम यह कहता है कि मनरेगा के तहत काम का प्रस्ताव पंचायत करेगा किंतु जहां ऐसा नहीं हुआ निर्माण एजेंसी ना तो पंचायत है ना जनपद 2020 मे विभागीय इंजीनियर ने पूरा काम करा डाला। पूरे मामले में जिला पंचायत का आदेश क्रमांक 105 व 81 मई 2020 में स्वीकृत की गई 30 मई 2020 को कार्य आदेश जारी हुआ कार्य आदेश ग्राम पंचायत को जारी हुआ है किंतु निर्माण किसी और ने कराया है। पूरे मामले में जिला पंचायत सीईओ आईएएस हरीश एस ने कहा कि मामले की जानकारी लेकर ठोस कार्रवाई की जाएगी।
अब यहां देखने वही बात यह है कि भूपेश सरकार और महात्मा गांधी के नाम पर जनहित योजनाओं पर पलीता लगाने वाले जनप्रतिनिधि पर आलाकमान का कार्यवाही करते है



