प्रधानमंत्री आवास योजना से प्रदेश को वंचित करना राज्य सरकार की दमनकारी नीति
ढाई तीन साल में ही हांपने लगी कांग्रेस सरकार
29 नवम्बर 2021
बिलासपुर-{जनहित न्यूज़} छत्तीसगढ़ में इन दिनों धान खरीदी को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने है, धान खरीदी को लेकर बीजेपी के नेता लगातार बघेल सरकार पर निशाना साध रहे है अल्प समय के लिए निजी दौरे पर बिलासपुर पहुंचे प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ भवन में पत्रकारों से चर्चा करते हुए एक बार फिर बघेल सरकार पर जमकर बरसाए आरोपो के तीखे बाण रमन सिंह ने कहा कि में 15 साल राज्य के सीएम रहा लेकिन कभी भी बारदाने का संकट नहीं आया, लेकिन यह सरकार दो-ढाई साल में ही हांफ रही है।
बारदाने के लिए सरकार के पास पैसे नहीं है दरअसल, रमन सिंह ने एक ट्वीट करते हुए पहले लिखा कि ”छत्तीसगढ़ की बघेल सरकार के पास धान खरीदी के लिए बारदाने के रुपये नहीं है, पीएम आवास के तहत गरीबों को घर बनाकर देने के लिए रुपये नहीं है, कोई भी योजना बगैर कर्ज लिए पूरी नहीं होती और इन सबके बावजूद भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ के तथाकथित विकास मॉडल के गीत यूपी में गाये जा रहे हैं। ऐसे में प्रदेश में 1 दिसंबर से शुरू होने वाली धान खरीदी से ठीक पहले डा रमन सिंह ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को घेरते हुए कहा कि ”इनके पास बारदाना खरीदने के लिए रुपया नहीं है, लेकिन हर बात का दोष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर डालते है, हमने भी 15 साल लगातार धान खरीदी की लेकिन कभी भी बारदानों का संकट नहीं आया।
रमन सिंह ने कहा कि ”प्रदेश सरकार ने बहुत सारे वादे किये थे. उन वादे के विपरीत अपना चरित्र सरकार दिखा रही है. बारदाना भी खरीद नहीं पा रही है. यह सरकार हर मोर्चें पर दो- ढाई साल में ही हांफने लगी है. जिससे प्रदेश की जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
रमन सिंह यही नहीं रूके उन्होंने कहा कि पीएम आवास योजना को लेकर उन्होंने कहा कि ”इनके पास शराब के लिए रूपया है लेकिन गरीबों के आवास के लिए नहीं है, प्रदेश के लाखों गरीब पीएम आवास की राशि की बाट जोह रहे हैं, उन्होंने कहा कि भूपेश बघेल किस तरह की योजनाएं चला रहे है यह समझ से बाहर है. चुनाव के वक्त जो घोषणा पत्र जारी किया था सरकार उस घोषणा पत्र के विपरीत काम कर रही है।
महिला सहायता समूह का हक छीना
रमन सिंह ने बघेल सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि ”20 हजार मितानिन रेडी टू ईट बनाती हैं. ये काम पिछले पांच सालों से यह महिलाएं करके अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही थीं. सरकार ने उसको भी छीन कर उसका भी ठेका एक करोड़पति ठेकेदार को दे दिया. एक आदमी को ठेका देने और उससे पैसा लेने के लिए 20 हजार सहायता समूह का काम काम बंद करना यह बताता है कि इस सरकार की सोच कैसी है. बड़े-बड़े ठेकेदारों को लाकर रेडी टू ईट खिला रहे हैं. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 7 लाख 60 हजार गरीबों को आवास मिलना था. इससे 11 हजार करोड़ का लाभ छत्तीसगढ़ को होता, वह योजना वापस चली गई. इससे आम लोगों को परेशानी हो रही है।
ज्ञात हो कि धान खरीदी की मुद्दे पर बीजेपी लगातार बघेल सरकार पर हमलावर बनी हुई है, जिससे यह मुद्दा फिलहाल काफी गरमाया हुआ है।




