पुलिस कार्यवाही के बजाय लग गई समझौता कराने यही से सूदखोरों के बड़े हौसले…मृतक के परिजनों ने एसएसपी से लगाई न्याय की गुहार…क्लिक कर देखिए सुसाइड नोट
21 सितंबर 2022
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़] न्यायधानी बिलासपुर में इन दिनों अपराधों की जैसे बाढ़ सी आ गई है, हत्या डकैती और चाकूबाजी के सैकड़ों मामले सामने आ रहे हैं, जिसमें पुलिस प्रशासन पर कई गंभीर आरोप भी लग रहे हैं और पुलिस द्वारा अपराधियों पर कार्रवाई के नाम पर महज खानापूर्ति के आरोप भी निरंतर लगते आ रहे हैं। परंतु इन सबके बाद भी पुलिस प्रशासन के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है। अब सवाल यह उठता है कि इसी तरह यदि अपराधियों के हौसले बुलंद होते रहेंगे तो आमजन की सुरक्षा पर कई सवाल खड़े हो जाएंगे, इसी तरह आज एक घटना सामने आई जिसमें सूदखोरों की दबंगई से प्रताड़ित इंजीनियर युवक ने आत्महत्या कर ली और मृतक ने आत्महत्या करने से पहले उन लोगों के बारे में पूरी विस्तृत से सुसाइड नोट भी लिखा है। जिनकी प्रताड़ना से उसने इतना बड़ा कदम उठाया अब सवाल यह भी उठता है कि यदि पुलिस द्वारा मृतक युवक की शिकायत पर कार्यवाही की जाती तो शायद यह घटना घटित नहीं होती, मृतक के परिवार जनों का यह कहना है कि पुलिस इस मामले में निरंतर समझौता कराने का प्रयास करती रही है, यहां तक कि मृतक की पत्नी द्वारा सूदखोरों से पूर्व में किया गया एक समझौता नामा भी प्राप्त हुआ है। जिसमें जाहिर होता है कि वह लोग कितने बड़े बाहुबली थे और सच पूछो तो उनकी प्रताड़ना से कितना त्रस्त था कि अपनी पत्नी के नाम से उसे सूदखोरों से समझोता नामा करवाना पड़ा, मामला कुछ इस तरह है कि आसमां सिटी निवासी ऋषभ निगम ने बिजनेस हेतु चार लाख रुपया सूदखोरों से बतौर 5 प्रतिशत ब्याज पर लिया था। जिसके एवज में सूदखोरों को हर सप्ताह चालीस हजार देता था, यानी कुल मिलाकर मूलधन से कही अधिक ब्याज के रूप में दे चुका था, फिर भी सूदखोर हर बार मूलधन बाकी है का हवाला देकर उसे रकम ऐंठ रहे थे। अंततः जिससे मृतक ने प्रताड़ित होकर उन लोगों के नाम सुसाइड लेटर लिखने के बाद अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली, यह एक बड़ी घटना है और पूरे समाज के लिए बड़ा ही चिंता का विषय है कि यदि ऐसे सूदखोर इसी तरह आम लोगों को अपना शिकार बनाते रहेंगे, तो आमजन का जीना दूभर हो जाएगा और इसी तरह इन बाहुबलियों के हौसले बढ़ते जाएंगे और पुलिस मात्र कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कर चैन की नींद सो जाएगी यह एक गंभीर विषय है की आखिर क्यो इस तरह शहर की कानून व्यवस्था दिन-ब-दिन अपराधियों के हाथों की कठपुतली बनती जा रही है।
अब जरूरत है कि पुलिस विभाग के आला अधिकारियों को इस विषय पर गहन चिंतन की आवश्यकता है वरना हमेशा की तरह पुलिस इन अपराधियों के करतूतों से डायरियां भरती रहेगी। मृतक ने अपने सुसाइट नोट में लिखा है कि
हर हफ्ते घर में आकर गाली-गलौच करते थे दुकान में भी आकर प्रताड़ित करते थे।
पिता शिव कुमार निगम व भाई अजय निगम ने बताया कि ऋषभ इसकी शिकायत लेकर सकरी पुलिस के पास भी गया था, पर किसी तरह की कोई कांरवाई नहीं हुई। पुलिस ने दबाव बनाकर समझौता करा दिया और पुलिस से किसी तरह का सहयोग नही मिल रहा था तथा में सूदखोरों से इतना ज्यादा त्रस्त हो चुका हूँ। इसलिए मैं खुदकुशी कर रहा हूँ।
यह बात उसने सुसाइड नोट में मरने से पहले लिखी थी।
अब सवाल यह भी उठता है कि मृतक ऋषभ निगम किस तरह से इन सूदखोरों के मकड़जाल में फंसा और आखिर क्यो उसे रकम इतने तगड़े ब्याज पर लेनी पड़ी यह तो पूरी जांच के बात ही इसका खुलासा हो पायेगा। बहरहाल एक युवा का इस तरह से आत्महत्या कर लेना वो भी महज चंद लोगों की प्रताड़ना के कारण अपना हंसता खेलता घर संसार अपने ही हाथों से उजाड़ देना ये एक सोचनीय विषय है । लेकिन मृतक ने आत्महत्या करने के पहले खुदकुशी करने का कारण और खुदकुशी के लिए मजबूर करने वालो तीन सूदखोरों का मोबाइल नम्बर सहित नाम लिखा है, क्या उन पर कार्यवाही होगी या उनके रसूख के चलते एक बेगुनाह युवक की न्याय की वेदी पर बली चढ़ जाने पर परिजनों को खून के घूंट पीकर चुप हो जाना पड़ेगा। क्योंकि मृतक ने यह भी उल्लेख किया है कि वो लोग रसूखदार है और राजनीतिज्ञ है।
अब पूरे समाज को बस न्याय का ही इंतजार है।
मृतक के परिजनों ने आज एसएसपी से मिलकर न्याय की गुहार लगाई और एसएसपी ने इस मामले में जांच उपरांत दोषियों पर तत्काल कार्यवाही का आश्वासन दिया है।
देखिए सुसाइड नोट







