गरीबों के लिए संघर्ष मेरा सपना..वार्ड में हर जरूरतमंद को न्याय मिले और उसकी आवाज सुनी जाए-◆
बिलासपुर-{जनहित न्यूज़} रविन्द्रनाथ टैगोर नगर, वार्ड क्रमांक 52 लिगियाडीह से कांग्रेस प्रत्याशी दिलीप पाटिल का जीवन राजनीति और जनसेवा के प्रति समर्पण की मिसाल है। गरीबों और जरूरतमंदों के हक की लड़ाई लड़ने का जज्बा उन्हें विरासत में मिला। उनकी माता श्रीमती यशोदा पाटिल, 1989 और 1994 में कांग्रेस की प्रत्याशी और मनोनीत सरपंच रही थीं। उनकी समाजसेवा को आगे बढ़ाते हुए दिलीप पाटिल ने भी राजनीति में कदम रखा और गरीबों के उत्थान के लिए खुद को समर्पित कर दिया।

राजनीतिक सफर: संघर्ष और सेवा का संकल्प:-
2005 से सक्रिय कांग्रेस सदस्य के रूप में काम करने वाले दिलीप पाटिल 2007 में युवा कांग्रेस के सचिव भी रहे। शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने खुद को स्थापित किया, एम.ए., एल.एल.बी. और एम.ए. (पॉलिटिकल साइंस) की पढ़ाई पूरी कर राजनीति और समाज सेवा में आगे बढ़े। हालांकि वे राजनीति के दिग्गजों की रणनीतियों से दूर रहकर सीधे जनता के बीच काम करने में विश्वास रखते हैं, जिससे उन्होंने वार्डवासियों में एक भरोसेमंद और मददगार नेता की छवि बनाई है।

कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री संध्या तिवारी भी दिलीप पाटिल के समर्थन में उतरी मैदान में
उसी तारतम्य में आज वार्ड 52 के कांग्रेस प्रत्याशी दिलीप पाटिल ने दुर्गा मंदिर में पूजा अर्चना कर जनसंपर्क की शुरुआत की।

वार्ड की स्थिति और प्रमुख मुद्दे-:
परिसीमन के बाद वार्ड 52 में मतदाताओं की संख्या 7249 रह गई है, जिसमें महिला मतदाता (3670) पुरुषों (3579) से अधिक हैं। इस वार्ड के विकास के लिए दिलीप पाटिल कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर संघर्षरत हैं।
गरीबों के लिए लड़ाई, अंतिम सांस तक संघर्ष-:

उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता पूरे क्षेत्र में गरीबों को उनका भू-स्वामित्व पट्टा दिलाना है। वे कहते हैं, “जो लोग 50-60 सालों से इस जमीन पर बसे हैं, उनके पास कानूनी दस्तावेज नहीं हैं। मेरी लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक इन लोगों को उनका हक नहीं मिल जाता। गरीबों का घर टूटे बिना सड़क, नाली और चौड़ीकरण का काम हो यही मेरी मांग है।”

दिलीप पाटिल ने यह भी कहा कि भाजपा शासन में गरीबों के हक को नजरअंदाज किया गया है और वे कांग्रेस की विचारधारा को अपनाकर हर जरूरतमंद को उसका अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

बचपन से जनसेवा का जज्बा-:
राजनीति के प्रति उनकी रुचि बचपन से रही है। वे 1989 में सिर्फ 9 साल के थे, जब उन्होंने अपनी माता के साथ चुनाव प्रचार किया। 13 साल की उम्र में घर-घर जाकर पर्चे बांटे और कांग्रेस का संदेश जन-जन तक पहुंचाया। रविंद्र सिंह, शेख गफ़्फ़ार, विजय पांडे, अटल श्रीवास्तव जैसे वरिष्ठ नेताओं से उन्होंने सीखा कि जनसेवा कैसे की जाती है।

“बचपन में कांग्रेस प्रचार के लिए पोस्टर चिपकाने के बदले 5 रुपये मिलते थे। तब से मैं कांग्रेस का सच्चा सिपाही बना।”
मजबूत इरादों के साथ आगे बढ़ते गए-:
दिलीप पाटिल का कहना है कि वे अपने वार्ड के गरीबों और जरूरतमंदों के लिए संघर्षरत रहेंगे। वे कांग्रेस की विचारधारा के प्रति समर्पित हैं और मानते हैं कि राजनीति का उद्देश्य सत्ता नहीं, बल्कि जनता की सेवा होनी चाहिए। उनका सपना है कि वार्ड 52 के हर गरीब को उसका हक मिले, और इसके लिए वे अंतिम सांस तक लड़ते रहेंगे।

“अगर मैं न भी रहूं, तो भी लोग मेरे नाम को याद करें कि मैंने गरीबों के लिए संघर्ष किया। मेरा सपना है कि मेरे वार्ड में हर जरूरतमंद को न्याय मिले और उसकी आवाज सुनी जाए।”
अब वार्ड 52 के मतदाताओं को फैसला करना है कि वे कैसा नेतृत्व चाहते हैं एक ऐसा जनसेवक जो वर्षों से उनकी सेवा में समर्पित है या कोई और..?

