व्यापारिक एकता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ इस नियम में बदलाव की संगठन ने की मांग-◆
बिलासपुर-{जनहित न्यूज़} रायपुर छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज रायपुर के आगामी चुनाव को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन ने चुनावी नियमों में असमानता का आरोप लगाते हुए इसे व्यापारियों के हितों के खिलाफ बताया है। सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष कमल सोनी ने बताया कि चुनाव नियमों के अनुसार अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष पद के लिए केवल रायपुर के सदस्य ही पात्र हैं, जबकि छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों के व्यापारियों को चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं दिया गया है। उन्होंने इसे अनुचित बताते हुए चुनाव अधिकारी और सहायक चुनाव अधिकारी से इस नियम का स्पष्टीकरण मांगा।
संघ के नियमों में विरोधाभास संघ की नियमावली के अध्ययन से पता चला कि धारा-9 (1) के अनुसार, “संघ का प्रत्येक सदस्य किसी भी पद के लिए चुनाव लड़ सकता है।” लेकिन धारा-15 में यह स्पष्ट किया गया है कि अध्यक्ष, महामंत्री और कोषाध्यक्ष के पदों पर केवल रायपुर या नया रायपुर के व्यापारी ही चुनाव लड़ सकते हैं।
इस विरोधाभास पर सवाल उठाते हुए सराफा एसोसिएशन ने कहा कि यह नियम व्यापारिक एकता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है। संघ के अन्य जिलों के सदस्यों को इस नियम की जानकारी तक नहीं थी, और जब उन्हें इसकी सूचना मिली, तो वे आक्रोशित हो गए। व्यापारियों के हितों की अनदेखी
सराफा एसोसिएशन का कहना है कि यह नियम अन्य जिलों के व्यापारियों के अधिकारों का हनन करता है और तुष्टिकरण की नीति को बढ़ावा देता है। संगठन ने मांग की है कि इस भेदभावपूर्ण नियम को तुरंत बदला जाए और सभी जिलों के व्यापारियों को समान अवसर दिया जाए।
संघ के महासचिव प्रकाश गोलछा और कोषाध्यक्ष हर्षवर्धन जैन ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि यह नियम नहीं बदला गया तो अन्य जिलों के व्यापारी संघ के खिलाफ उचित फोरम में शिकायत दर्ज कराएंगे और विरोध प्रदर्शन करेंगे।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है और क्या चुनाव नियमों में कोई बदलाव किया जाएगा?
या फिर संघ के विरोध को अनदेखा किया जाता है।

