बिलासपुर-{जनहित न्यूज़}
[श्रीमती मंजू चटर्जी…] हर युग में नारी ने अपनी ताकत और सहनशीलता का परिचय दिया है, फिर भी समाज उसे कमजोर समझने की भूल करता रहा। लेकिन अब दौर बदल चुका है। आज की नारी सिर्फ़ घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं, बल्कि वह हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही है।
“काफ़ी अकेली हो गई हूं” लेकिन “अकेली ही काफ़ी हूं” तक का सफर ही नारीत्व की पहचान है। नारी, जो कभी नहीं हारी, समाज की वास्तविक रचनाकार है। वह मां, बहन, बेटी, पत्नी और एक सशक्त योद्धा भी है। आज की महिला किसी पर निर्भर नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान की जीवंत मिसाल है।
आज की नारी: हर भूमिका में सशक्त
नारी सिर्फ़ घर नहीं संभालती, बल्कि सूझबूझ से दुनिया भी चलाती है। वह समाज की रीढ़ है, जो परिवार को स्नेह से जोड़ती है और अपने कर्तव्यों को पूरी निष्ठा से निभाती है।
एक मां बनकर वह अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देती है..एक गुरु बनकर वह आने वाली पीढ़ियों को ज्ञान और शिक्षा से सशक्त करती है। एक अन्नपूर्णा बनकर वह परिवार को प्रेम और देखभाल का आहार देती है। एक योद्धा बनकर वह अन्याय और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाती है।
बराबरी की है बात सारी, मैं हूं आज की नारी!
आज की महिला किसी से कम नहीं। वह बराबरी का हक चाहती है, न कि विशेषाधिकार। वह चाहती है कि उसे उसकी मेहनत, प्रतिभा और काबिलियत के आधार पर सम्मान मिले।
हर दिन महिला दिवस!
महिला सशक्तिकरण का जश्न सिर्फ़ 8 मार्च तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह हर दिन का उत्सव है, जब एक महिला दूसरी महिला का समर्थन करती है और पुरुष समाज उसे मान-सम्मान देता है। लोग कहते हैं, “औरत का कोई घर नहीं होता,” लेकिन सच्चाई यह है कि “एक औरत के बिना, घर भी घर नहीं होता।”
सम्मान करें, सशक्त करें!
हर महिला अपने आप में पूर्ण है। उसे किसी की दया नहीं, बल्कि समर्थन और समानता चाहिए। समाज को चाहिए कि वह नारी के हर रूप का सम्मान करे और उसे उसके अधिकार दे, क्योंकि नारी सशक्त होगी, तभी समाज भी सशक्त होगा!

