परिजनों ने लगाया इलाज में लापरवाही का आरोप…अस्पताल प्रशासन बोला मरीज की हालात पहले से ही थी नाजुक हमने अपना फर्ज पूरी ज़िम्मेदारी से निभाया
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़] शहर के मिशन हॉस्पिटल रोड स्थित यूनिटी हॉस्पिटल में बीएससी नर्सिंग की छात्रा किरण वर्मा की मौत के बाद परिजनों और अस्पताल प्रशासन के बीच तनाव बढ़ गया है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही के कारण उनकी बेटी की जान गई, जबकि अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि छात्रा पहले से ही गंभीर बीमारी से जूझ रही थी और उन्होंने पूरी कोशिश की, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।
परिजनों का आरोप: इलाज में लापरवाही बनी मौत की वजह मुंगेली जिले के सिलदहा गांव की रहने वाली किरण वर्मा (22 वर्ष) लगरा नर्सिंग कॉलेज में बीएससी नर्सिंग तृतीय वर्ष की छात्रा थीं। परिजनों के अनुसार, किरण को गले में ट्यूमर की सर्जरी के लिए 7 मार्च को अस्पताल में भर्ती किया गया था। ऑपरेशन से पहले उन्हें एनेस्थीसिया दिया गया, लेकिन इसके बाद वह कभी होश में नहीं आईं और कोमा में चली गईं।

परिवार के आरोप:
जब किरण की हालत बिगड़ रही थी, तब भी अस्पताल प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई।
समय पर उचित इलाज नहीं मिला, जिससे उनकी हालत और ज्यादा बिगड़ गई।
जब परिजनों ने मरीज की स्थिति जाननी चाही, तो उन्हें मिलने नहीं दिया गया।
अस्पताल की रिपोर्ट में भर्ती तारीख 27 फरवरी दर्ज है, जबकि परिजनों के अनुसार, किरण को 7 मार्च को भर्ती किया गया था।
इस पर डॉ ठकराल का जवाब है कि मरीज 7 मार्च की ही एडमिट किया गया था प्रिंटिंग त्रुटि से 27 फरवरी हुआ है।

डॉ अंकित ठकराल ने कहा…
कि यदि रात 8 बजे छात्रा की मौत हो गई तब परिजन उसे हॉस्पिटल में ही छोड़ कर क्यो चले गए…?
और फिर सुबह एक नेता जी के साथ आकर सौदेबाजी करने का प्रयास किया गया जो कि मानवता को शर्मसार करता है।
पूरे विश्व मे डॉक्टर सिर्फ इलाज करता है परंतु जीवन और मृत्यु उस ऊपर वाले के हाथ होती है, में हालांकि मुझे भी उस बच्ची की मौत पर दुःख हुआ और एक डॉक्टर होने के नाते नही एक सामान्य इंसान के नाते हुआ पर हमने उस बच्ची को बचाने में कोई कोर कसर नही छोड़ी।

घटना के बाद गुस्साए परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा किया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उनका कहना है कि यह स्पष्ट मेडिकल लापरवाही का मामला है और अस्पताल प्रशासन को इसका जवाब देना होगा।
अस्पताल प्रशासन का पक्ष: हमने पूरी कोशिश की लेकिन छात्रा पहले से थी गंभीर बीमारी से त्रस्त थी..
इस पूरे मामले पर यूनिटी हॉस्पिटल के प्रबंधक डॉ. अंकित ठकराल ने परिजनों के आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद साक्ष्यों के साथ प्रेस वार्ता कर स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
डॉ. ठकराल का दावा:
किरण वर्मा को थायरॉइड कैंसर था, जिससे वह पहले से ही बीमार और कमजोर थीं।
उनकी हार्ट क्षमता केवल 20-30% थी, जिससे उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ा था।
ऑपरेशन के दौरान बेहोशी (एनेस्थीसिया) देने के बाद उनकी ऑक्सीजन नली बंद हो गई, जिससे जान बचाने के लिए गले में छेद कर ऑक्सीजन दी गई।
ऑपरेशन सफल रहा, लेकिन उनकी हालत पहले से ही इतनी गंभीर थी कि वह रिकवर नहीं कर सकीं।
डॉक्टरों की दलील:
“हमने हर संभव कोशिश की, लेकिन मरीज पहले से ही इतनी गंभीर स्थिति में थी कि उसे बचाना संभव नहीं था। यह कहना कि हमने लापरवाही की, गलत होगा।”
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से होगा खुलासा
फिलहाल, पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि किरण की मौत किस वजह से हुई – अस्पताल की लापरवाही से या फिर पहले से मौजूद गंभीर बीमारी के कारण।
कौन है दोषी? जांच के बाद होगा फैसला
इस घटना ने फिर से निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और मेडिकल लापरवाही के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। यदि परिजनों के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह एक गंभीर मेडिकल लापरवाही का मामला होगा, और यदि अस्पताल का दावा सही निकलता है, तो यह एक दुर्भाग्यपूर्ण चिकित्सीय असफलता मानी जाएगी।
अब सबकी नजरें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच पर टिकी हैं, जो इस मामले की असली सच्चाई सामने लाएगी।
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