कहा..!
जब सरकार खुद शराब बेच रही है, तो पीने वालों को इधर-उधर छुपकर क्यों भटकना पड़े?
बिलासपुर-{जनहित न्यूज़} पेंड्रा से अजब खबर…! जहां एक ओर पंचायतें गांवों को नशामुक्त बनाने की कोशिश में लगी हैं, वहीं पेंड्रा ब्लॉक की एक पंचायत में कुछ अलग ही सोच सामने आई है। यहां के पंच रमेश गुप्ता
यादव ने बाकायदा पंचायत बैठक में प्रस्ताव रखा “शराब तो लोग पी ही रहे हैं, अब उन्हें ठिकाने से बैठने की जगह तो दे दो!”
जी हां, आपने सही पढ़ा। पंच महोदय चाहते हैं कि गांव में एक वैध और व्यवस्थित “अहाता” खोला जाए, जहां लोग बिना डर के बैठकर शराब पी सकें न खेत में, न नाले के किनारे, न ही पेड़ की आड़ में!

पुलिस परेशान, ग्रामीण हलाकान समाधान: बैठने की व्यवस्था! पंच का तर्क बिल्कुल अनोखा है। उनका कहना है, “जब सरकार खुद शराब बेच रही है, तो पीने वालों को इधर-उधर छुपकर क्यों भटकना पड़े? कोई खेत में बैठा है, कोई मुर्गी के दड़बे के पीछे। पुलिस आए तो भागमभाग, गिरने-पड़ने में चोटें तक लगती हैं। अब अगर एक जगह बैठकर शांति से पिएंगे, तो न हंगामा होगा, न रेड की टेंशन!”
पंचायत में मिली सहमति, महिलाएं बोलीं — “घर बर्बाद कर दोगे!”
गांव के कुछ पंचों और बुजुर्गों ने इस प्रस्ताव को सिर हिलाकर समर्थन दिया। वहीं दूसरी ओर, गांव की महिलाओं का गुस्सा सातवें आसमान पर है। एक महिला ने कहा, “पहले तो घर के पीछे छुपकर पीते थे, अब पंचायत के बीचोंबीच ही बार चलाओगे क्या?”
सरपंच बोले – ‘सोचने लायक है!’
गांव के सरपंच दुर्गा ओट्टी ने इसे अजीब जरूर कहा, लेकिन पूरी तरह खारिज नहीं किया। “अगर इससे गांव की लड़ाई-झगड़े की घटनाएं कम हों और पुलिस का आना-जाना घटे, तो क्यों न सोचा जाए?” उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्ताव को प्रशासन तक भेजा जाएगा।
बाकी जिलों की तरह मॉडल बन सकता है ये गांव!
कुछ जिलों में शराब दुकानों के पास बने अहाते पहले से मौजूद हैं। वहां लोग शांति से पीते हैं, खटिया पर लेटते हैं और टाइम पर घर लौट जाते हैं। पंच रमेश गुप्ता चाहते हैं कि उनके गांव में भी ऐसा ही “सुसंस्कृत पीने का स्थान” हो।
निष्कर्ष: पंच बोले – ‘पिएंगे तो राजा की तरह!’
ये प्रस्ताव सुनकर जहां एक ओर गांव में हंसी-ठिठोली का माहौल बना है, वहीं प्रशासन असमंजस में है कि इसे ‘लोकतांत्रिक विचार’ माना जाए या ‘लोकल जुगाड़’। बहरहाल, पंच भोलाराम का यह प्रस्ताव गांव की “अजब-गजब पंचायत नीति” में दर्ज होने लायक है।
अब देखना है कि जिला प्रशासन इसे ‘नशामुक्त गांव’ के खिलाफ मानता है या ‘सुसंस्कृत नशा सेवन नीति’ की शुरुआत!

