बिलासपुर के बाद अब रायपुर में भी पत्रकारों पर हुआ हमला…!
रायपुर-{जनहित न्यूज़} एक के बाद एक घटनाएं सुरक्षा पर उठे सवाल रायपुर में एक बार फिर पत्रकारों पर हमले की गंभीर घटना सामने आई है, जिसने पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। 25 मई 2025 को मेकाहारा अस्पताल में दो पत्रकारों पर हुए हमले के मामले में चार आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
इनमें वसीम अकरम उर्फ वसीम बाबू, सूरज राजपूत, मोहन राव गौरी और जतीन गंजीर शामिल हैं। एक निजी चैनल के पत्रकार तहसीन जैदी पर अस्पताल के गार्ड ने न केवल गाली-गलौच की बल्कि धक्का मुक्की भी की, जिससे उन्हें चोट आई।

वहीं एक वेब पोर्टल के पत्रकार शिवम मिश्रा जब अपने सहयोगी पत्रकार की मदद के लिए मौके पर पहुंचे तो उनके साथ भी मारपीट हुई और पिस्टल तानकर जान से मारने की धमकी दी गई।
इस गंभीर घटना के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने तत्काल संज्ञान लेते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए। पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया और एक पिस्टल व 22 जिंदा कारतूस भी जब्त किए।

सवालों के घेरे में पत्रकारों की सुरक्षा
यह कोई पहली घटना नहीं है जब पत्रकारों को उनके कर्तव्यों के दौरान हिंसा का सामना करना पड़ा हो। हाल ही में बिलासपुर में भी पत्रकारों के साथ मारपीट की घटनाएं हुई थीं। अब रायपुर में भी ऐसी ही घटना दोहराई गई है।
क्या पत्रकारों की सुरक्षा अब वाकई खतरे में है?
क्या प्रशासन समय रहते प्रभावी कदम उठा रहा है? क्या पत्रकारों को अब खबरें दिखाने से पहले अपनी सुरक्षा की चिंता करनी होगी?
इन सवालों के जवाब जरूरी हैं क्योंकि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ अगर सुरक्षित नहीं रहेगा तो सच्चाई सामने लाना कठिन हो जाएगा। समय की मांग है कि पत्रकारों को न सिर्फ कानूनी संरक्षण मिले, बल्कि ऑन-ग्राउंड सुरक्षा भी सुनिश्चित हो। पत्रकारों पर हमले सिर्फ व्यक्ति पर हमला नहीं, लोकतंत्र की आत्मा पर चोट है।

अब समय आ गया है कि इस गंभीर विषय पर समाज और प्रशासन दोनों को जागरूक होकर ठोस कदम उठाने होंगे।

