पूर्व में रहे एसडीएम और भू-अर्जन अधिकारी कोटा अरपा-भैंसाझार भूमि अधिग्रहण में गड़बड़ी के लगे थे आरोप…
बिलासपुर {जनहित न्यूज} अरपा-भैंसाझार नहर परियोजना में करोड़ों के मुआवजा घोटाले में बड़ा खुलासा हुआ है। तत्कालीन कोटा एसडीएम और भू-अर्जन अधिकारी रहे आनंद स्वरूप तिवारी पर मुआवजा वितरण में भारी अनियमितता और शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाने के गंभीर आरोप साबित होने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वर्तमान में बिलासपुर में आरटीओ पद पर पदस्थ तिवारी पर लंबे समय से गड़बड़ी के आरोप लग रहे थे, लेकिन अब शासन ने सख्ती दिखाते हुए कार्रवाई की है।
जमीन दूर मुआवजा पास भ्रष्टाचार का खेल उजागर
जांच में सामने आया है कि कई अपात्र व्यक्तियों को मुआवजा दिया गया, यहां तक कि ऐसी जमीनें जो प्रस्तावित नहर मार्ग से काफी दूर थीं, उन्हें भी अधिग्रहण दिखाकर भुगतान कर दिया गया। इससे राज्य को करोड़ों की आर्थिक हानि हुई। मामले में पहले ही कई पटवारियों पर गाज गिर चुकी है, लेकिन तिवारी को अब तक बख्शा गया था।
अब शासन सख्त तत्काल निलंबन के आदेश
सामान्य प्रशासन विभाग ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत यह कार्रवाई की है। शासन का मानना है कि तिवारी का कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 का उल्लंघन है, जो उनकी लापरवाही और कर्तव्य के प्रति उदासीनता को दर्शाता है। निलंबन की अवधि में उनका मुख्यालय बिलासपुर संभागायुक्त कार्यालय रखा गया है।

क्या है अरपा-भैंसाझार परियोजना घोटाला?
इस परियोजना के तहत बड़ी मात्रा में भूमि अधिग्रहण की गई थी, लेकिन मुआवजा वितरण में गंभीर गड़बड़ियों की शिकायतें लंबे समय से उठती रही हैं। अब जांच में अनियमितताएं प्रमाणित होने पर शासन ने उच्च स्तर पर कार्रवाई की शुरुआत की है।
सरकार का संकेत भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’
इस निलंबन के जरिए शासन ने साफ संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार में लिप्त कोई भी अधिकारी बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो।


