प्रो रेसलिंग लीग 2026 से होगी नए युग की शुरुआत…
नई दिल्ली-{जनहित न्यूज़}
नई दिल्ली भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक विश्व कप जीत ने जहाँ देशभर में महिला खेलों को नई पहचान दी है, वहीं अब महिला कुश्ती भी देश की नई खेल क्रांति की अगली कहानी लिखने को तैयार है। इसी कड़ी में, प्रो रेसलिंग लीग (PWL) की शानदार वापसी की आधिकारिक घोषणा नई दिल्ली में की गई, जो जनवरी 2026 से शुरू होगी।
यह सिर्फ एक लीग नहीं, बल्कि भारत में महिला सशक्तिकरण, खेल समानता और नई संभावनाओं का प्रतीक बनकर उभर रही है।
प्रो रेसलिंग लीग 2026: भारतीय खेलों में नया अध्याय भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के सहयोग से पुनः शुरू हो रही PWL अब पूरी तरह आधुनिक, पेशेवर और लैंगिक समानता पर केंद्रित होगी।
आईपीएल की तर्ज़ पर फ्रेंचाइज़ी आधारित इस लीग में भारत के साथ विदेशी पहलवान भी भाग लेंगे।
WFI प्रवक्ता ने लॉन्च के दौरान कहा…
PWL की वापसी सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि यह भारत की महिला पहलवानों को वैश्विक मंच पर अपनी पहचान दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। महिला क्रिकेट की तरह अब कुश्ती भी भारत की नई खेल क्रांति की धुरी बनेगी।
महिला खिलाड़ियों को मिलेगा बराबर अवसर PWL 2026 की सबसे बड़ी विशेषता है महिला पहलवानों का समान प्रतिनिधित्व और उनके मुकाबलों को प्राइम टाइम प्रसारण में प्राथमिकता।
लीग आयोजकों ने चार बड़े वादे किए हैं…
हर टीम में महिला पहलवानों को बराबर मौका।
महिला मुकाबले होंगे प्राइम टाइम स्लॉट में। नई प्रतिभाओं को अनुभवी चैंपियनों से जोड़ा जाएगा। इनामी राशि और स्पॉन्सरशिप में पूर्ण समानता।
PWL के CEO अखिल गुप्ता ने कहा…
यह सिर्फ एक लीग नहीं, बल्कि एक सपना है — जहाँ हर लड़की को यह विश्वास हो कि वो भी कर सकती है। यह भारत में ताकत और बहनचारे का आंदोलन है।
क्रिकेट की प्रेरणा, कुश्ती का नया अवसर
महिला क्रिकेट टीम की विश्व कप जीत के बाद, अब कॉरपोरेट और प्रायोजकों की नज़र महिला कुश्ती पर भी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह ऊर्जा अब अखाड़े में भी दिखेगी, जिससे PWL को दर्शकों, विज्ञापनों और निवेश के नए अवसर मिलेंगे।

भारत पहले से ही साक्षी मलिक, अंतिम पंघाल, विनेश फोगाट जैसी विश्वस्तरीय पहलवानों से समृद्ध है… ऐसे में PWL 2026 कुश्ती को गाँव के अखाड़ों से निकालकर राष्ट्रीय प्राइम टाइम खेल बना सकती है।
जमीनी सशक्तिकरण से ओलंपिक उम्मीद तक
हरियाणा, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में नई प्रशिक्षण अकादमियाँ तैयार हैं, जो युवा महिला पहलवानों को पहचान और प्लेटफ़ॉर्म देने पर केंद्रित होंगी।
सरकारी योजनाएँ और CSR समर्थित संस्थान मिलकर कोचिंग, पोषण और अंतरराष्ट्रीय exposure बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
इससे भारत की कुश्ती पेरिस 2028 ओलंपिक और आगे के खेल आयोजनों में पदक की मजबूत दावेदार बन सकती है।
निष्कर्ष: भारत की बेटियाँ लिख रहीं हैं खेल इतिहास का नया अध्याय
महिला क्रिकेट की गूँज अभी थमी नहीं कि अब महिला कुश्ती की हुंकार तैयार है।
प्रो रेसलिंग लीग 2026 न सिर्फ एक स्पोर्ट्स इवेंट है, बल्कि एक आंदोलन है…
भारत की बेटियों की ताकत, समानता और गौरव की कहानी का नया अध्याय। मैदान से लेकर अखाड़े तक भारत की महिलाएँ अब खेल ही नहीं रही हैं, बल्कि इतिहास रच रही हैं।

