विद्युत विभाग का विशेष वसूली अभियान अब विवादों के भंवर में फंसा…!
व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल !
बिलासपुर-{जनहित न्यूज़}
बिलासपुर छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड द्वारा बकाया बिजली बिलों की वसूली को लेकर शुरू किया गया विशेष अभियान अब विवादों के भंवर में फंसता नजर आ रहा है। एक ओर विभाग कड़े शब्दों में चेतावनी दे रहा है कि बिल नहीं भरा तो कनेक्शन कटेगा वहीं दूसरी ओर 52 लाख से अधिक के बकायेदार संस्थान का कनेक्शन आज भी निर्बाध चालू है। यही विरोधाभास अब बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा प्रश्नचिन्ह बन गया है।
1 लाख से ऊपर बकाया वालों पर गाज
बिजली विभाग के अनुसार बिलासपुर जिले में ऐसे 1306 उपभोक्ता हैं, जिन पर 1 लाख रुपये से अधिक का बिजली बिल बकाया है। इनमें शासकीय और गैर-शासकीय दोनों श्रेणियों के उपभोक्ता शामिल हैं।
देखिए ऐसे उपभोगताओं की सूची…👇

विभाग ने साफ कर दिया है कि
लंबे समय से बकाया रखने वालों का पहले कनेक्शन काटा जाएगा
पहले से कटे कनेक्शन वालों को कानूनी नोटिस भेजे जाएंगे।
समय-सीमा में भुगतान नहीं हुआ तो कोई रियायत नहीं लेकिन सवाल उठाता है सेंट जेवियर्स स्कूल का मामला
इसी अभियान के बीच एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सेंट जेवियर्स स्कूल, बिलासपुर पर विभाग के अनुसार ₹52,14,167/- का बिजली बिल बकाया है।
फिर भी स्कूल का बिजली कनेक्शन पूरी तरह सुचारू है।
यह वही विभाग है जो आम उपभोक्ता का 5–10 हजार बकाया होने पर भी तुरंत लाइन काट देता है।
क्या बोले कार्यपालक निदेशक….?
जब इस विषय में बिलासपुर क्षेत्र के कार्यपालक निदेशक श्री ए.के. अम्बस्थ से सवाल किया गया तो उन्होंने बताया…
सेंट जेवियर्स स्कूल का पुराना बिल त्रुटिपूर्ण था। बिजली खपत कम दर्शाई जा रही थी। अब सुधार कर डिफरेंस के आधार पर नया बिल जारी किया गया है। स्कूल प्रबंधन ने किस्तों में भुगतान हेतु आवेदन दिया है।

असली सवाल यहीं से शुरू होते हैं…?
क्या 52 लाख रुपये का बिल एक-दो महीने का हो सकता है…?
अगर यह एक साल या उससे अधिक का है, तो विभाग इतने समय तक क्या करता रहा?
क्या ऐसे और भी बड़े उपभोक्ता हैं, जिन पर लाखों का बकाया है लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं हुई…?
क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या विशेष कृपा…?
आम उपभोक्ता बनाम बड़े बकायेदार
आज स्थिति यह है कि छोटा उपभोक्ता तुरंत कनेक्शन कट बड़ा संस्थान किस्तों की सुविधा यही दोहरा मापदंड अब विभाग की नीयत और नीति दोनों पर सवाल खड़े कर रहा है।

बकाया वसूली की कार्रवाई जरूरी भी है और स्वागतयोग्य भी, लेकिन अगर नियम सभी के लिए समान नहीं होंगे, तो यह अभियान विश्वसनीयता खो देगा।
अब देखने वाली बात यह होगी किक्या विभाग सच में बड़े बकायेदारों पर भी उतनी ही सख्ती दिखाएगा…?
या फिर यह अभियान सिर्फ कमजोर उपभोक्ताओं तक ही सीमित रह जाएगा?
जनहित न्यूज़ इस पूरे मामले पर अपनी नजर बनाए हुए है…

