अब सिम्स में जल्द शुरू होगी अत्याधुनिक मैमोग्राफी की सुविधा…
पूरे संभाग को मिलेगा इस सुविधा का लाभ…!
बिलासपुर-{जनहित न्यूज़}
बिलासपुर और आसपास के जिलों की महिलाओं के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर है। छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (सिम्स) में जल्द ही स्तन कैंसर की जांच हेतु अत्याधुनिक मैमोग्राफी मशीन की सुविधा प्रारंभ होने जा रही है। इस नई तकनीक के माध्यम से महिलाओं में स्तन कैंसर की शुरुआती अवस्था में ही सटीक पहचान संभव होगी, जिससे समय पर उपचार कर जीवन को सुरक्षित किया जा सकेगा।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार स्तन कैंसर महिलाओं में तेजी से बढ़ती गंभीर बीमारियों में शामिल है। जागरूकता की कमी और समय पर जांच न होने के कारण कई मामलों में रोग का पता देर से चलता है। ऐसे में उपचार जटिल हो जाता है। सिम्स द्वारा शुरू की जा रही यह सुविधा इस चुनौती से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने बताया कि संस्थान निरंतर आधुनिक चिकित्सा संसाधनों को विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मैमोग्राफी तकनीक स्तन में होने वाले सूक्ष्म बदलावों, गांठ या असामान्यता की प्रारंभिक पहचान में बेहद प्रभावी है। इससे चिकित्सकों को सही समय पर उचित उपचार योजना बनाने में मदद मिलेगी।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने जानकारी दी कि सिम्स में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। महिलाओं की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अस्पताल में विशेष सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। नई मैमोग्राफी मशीन के माध्यम से स्तन कैंसर की स्क्रीनिंग और जांच अधिक सटीक, सुरक्षित और प्रभावी तरीके से की जा सकेगी।
इस सुविधा का लाभ केवल बिलासपुर ही नहीं, बल्कि जांजगीर-चांपा, कोरबा, मुंगेली और रायगढ़ सहित आसपास के जिलों की महिलाओं को भी मिलेगा। अब जांच के लिए बड़े महानगरों या निजी अस्पतालों पर निर्भरता कम होगी, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी।

क्या है मैमोग्राफी…?
मैमोग्राफी एक विशेष एक्स-रे जांच प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से स्तन की आंतरिक संरचना की विस्तृत तस्वीरें ली जाती हैं। यह परीक्षण स्तन कैंसर की प्रारंभिक पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कब कराएं जांच…?
यदि किसी महिला को स्तन में गांठ, असामान्य दर्द, सूजन, त्वचा में बदलाव, निप्पल से स्राव या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो उसे नजरअंदाज न करें। तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेकर जांच करानी चाहिए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित स्क्रीनिंग और समय पर जांच से स्तन कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सिम्स की यह नई पहल महिलाओं के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।
संदेश स्पष्ट है। जागरूकता, जांच और समय पर उपचार ही सुरक्षा की कुंजी है।

