एसडीआरएफ के साथ मॉक ड्रिल एवं अधिष्ठाता अधीक्षक ने स्वयं किया अग्निशमन प्रशिक्षण…
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़] छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) चिकित्सालय, बिलासपुर में मरीजों, परिजनों, चिकित्सकों एवं कर्मचारियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए फायर सेफ्टी व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया गया है। संयुक्त संचालक एवं अधीक्षक कार्यालय दिनांक 06 अप्रैल 2026 के निर्देशों अनुरूप संस्थान में व्यापक फायर सेफ्टी अभियान, विभागवार जिम्मेदारी निर्धारण, फ्लोर प्रभारी नियुक्ति, फायर ऑडिट, इलेक्ट्रिकल ऑडिट, मासिक मॉक ड्रिल तथा एसडीआरएफ के साथ संयुक्त आपदा प्रबंधन अभ्यास की शुरुआत की गई।

संस्थान परिसर में स्थापित 664 अग्निशमन सिलेंडरों की विस्तृत जांच, परीक्षण एवं रिफिलिंग समीक्षा की गई। वार्ड, आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर, ट्रॉमा, आपातकालीन विभाग, लैब, प्रशासनिक भवन तथा मरीजों की आवाजाही वाले सभी संवेदनशील क्षेत्रों में लगे अग्निशमन उपकरणों की कार्यक्षमता, प्रेशर, वैधता एवं उपयोगिता का सूक्ष्म परीक्षण किया गया। जिन उपकरणों में तकनीकी कमी अथवा रिफिलिंग की आवश्यकता पाई गई, उन्हें तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए।

कार्यवाही विवरण पत्र के अनुसार उत्कर्ष शर्मा, सिविल इंजीनियर (सीजी एमएससी) को संस्थान का फायर सेफ्टी ऑफिसर नियुक्त किया गया है। उनके नेतृत्व में समस्त फायर ऑडिट, इलेक्ट्रिकल सुरक्षा निरीक्षण, आपातकालीन निकास मार्ग, अलार्म सिस्टम तथा विभागीय समन्वय कार्य संपादित किए जाएंगे।
सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए अस्पताल की पांचों मंजिलों हेतु अलग-अलग फ्लोर प्रभारी नियुक्त किए गए हैं।
प्रथम तल श्रीमती पुष्पलता एवं श्रीमती राजकुमारी चौहान
द्वितीय तल: अजय शर्मा एवं सुश्री राशि पाण्डेय
तृतीय तल: कमलेश देवांगन एवं चंद्रशेखर साहू
चतुर्थ तल: पवन कुमार साहू
पंचम तल: संतोष चंद्रवंशी
इन प्रभारियों को अपने-अपने तल पर फायर सिलेंडर, अलार्म सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट, विद्युत उपकरणों तथा सुरक्षा संकेतकों की नियमित निगरानी एवं किसी भी कमी की तत्काल सूचना देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
आज आयोजित विशेष फायर मॉक ड्रिल एवं आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण में फायर इंस्पेक्टर वेद नारायण सेन ने कर्मचारियों को आग लगने की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया, अग्निशमन यंत्रों के सुरक्षित उपयोग, धुएं से बचाव, विद्युत शॉर्ट सर्किट से उत्पन्न आग पर नियंत्रण तथा मरीजों की सुरक्षित निकासी के व्यावहारिक उपाय बताए। उनके साथ फायरमैन मोहन साहू एवं उमेश कश्यप ने लाइव डेमो के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान किया।
प्रशिक्षण में संजय कुमार, अभिषेक यादव, श्याम कार्तिक सहित संस्थान के अनेक कर्मचारियों ने भाग लिया। वहीं एसडीआरएफ टीम के राजेश राठौर, प्रदीप राठौर, धनेश्वर सिदार एवं संजय बघेल ने रेस्क्यू, स्ट्रेचर मूवमेंट, बंद स्थानों एवं ऊंचाई से सुरक्षित निकासी तथा आपदा के दौरान समन्वित राहत कार्य का प्रभावी प्रदर्शन किया।
इस प्रशिक्षण की विशेष बात यह रही कि अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति एवं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने स्वयं अग्निशमन सिलेंडर उठाकर आग बुझाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण लिया। उन्होंने कर्मचारियों के साथ मिलकर फायर एक्सटिंग्विशर के संचालन, आग की प्रारंभिक अवस्था में नियंत्रण तथा आपात स्थिति में त्वरित निर्णय की प्रक्रिया को समझा। वरिष्ठ प्रशासनिक नेतृत्व की इस सक्रिय भागीदारी से कर्मचारियों में सुरक्षा के प्रति जागरूकता और आत्मविश्वास दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि सिम्स जैसे बड़े संस्थान में सुरक्षा मानकों का सर्वोच्च स्तर बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है और मरीजों की सुरक्षा के लिए सभी विभागों को निर्धारित प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करना होगा।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने बताया कि अब प्रत्येक माह नियमित फायर ऑडिट, इलेक्ट्रिकल ऑडिट और मॉक ड्रिल आयोजित कर कर्मचारियों को सतत प्रशिक्षित किया जाएगा।
इस व्यापक पहल से सिम्स चिकित्सालय में सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिली है तथा मरीजों एवं परिजनों में विश्वास और सुरक्षा की भावना और अधिक सशक्त हुई है। डॉ.अमित ठाकुर. डॉ सुधांशु भट्ट, डॉ चंद्रहास ध्रुव डॉ अमित कुमार श्रीमती गरिमा पाण्डेय उज्जवला दास पिंकी दास सरिता बहादुर एवं मुकेश ठाकरे संतोष चंद्र सेन अधिकारी एवं कर्मचारियों की उपस्थिति में रहे।

