कहा…फर्जी नैरेटिव से सोशल मीडिया पर बदनाम करने की कोशिश…!
हेलमेट चेकिंग की सामान्य कार्रवाई को तोड़-मरोड़कर किया गया पेश…!
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़] सोशल मीडिया पर वायरल हुए उस वीडियो को लेकर अब नया विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें दावा किया जा रहा था कि ट्रैफिक पुलिस ने गर्भवती महिला को अस्पताल ले जा रहे वाहन को रोककर चालानी कार्रवाई की। मामले ने तूल पकड़ने के बाद ट्रैफिक पुलिस ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए वायरल दावों को पूरी तरह भ्रामक, तथ्यहीन और मनगढ़ंत बताया है।
पुलिस के अनुसार, 12 मई 2026 को सकरी क्षेत्र में सड़क सुरक्षा और दुर्घटना नियंत्रण को लेकर विशेष हेलमेट चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था।
इसी दौरान दो युवक बिना हेलमेट बाइक पर सवार होकर सकरी से मुंगेली की ओर जाते पाए गए, जिन पर नियमानुसार हेलमेट एक्ट के तहत सामान्य चालानी कार्रवाई की गई।
न गर्भवती महिला थी न मेडिकल इमरजेंसी
ट्रैफिक विभाग का कहना है कि वायरल वीडियो में दिखाई गई कहानी वास्तविक घटनाक्रम से बिल्कुल अलग है। विभाग के मुताबिक बाइक पर कोई गर्भवती महिला सवार नहीं थी और न ही मामला किसी इलाज या मेडिकल इमरजेंसी से जुड़ा था।
पुलिस का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान एक व्यक्ति ने वीडियो रिकॉर्ड किया और बाद में उसे सोशल मीडिया पर इस दावे के साथ वायरल कर दिया कि पुलिस ने गर्भवती महिला को परेशान किया। अधिकारियों ने इसे पुलिस की छवि खराब करने और जनता को भ्रमित करने की कोशिश बताया है।
भ्रामक वीडियो से पुलिस जवानों का मनोबल प्रभावित
ट्रैफिक अधिकारियों ने कहा कि भीषण गर्मी और तेज धूप में सड़क सुरक्षा के लिए तैनात जवान लगातार लोगों की जान बचाने के उद्देश्य से नियमों का पालन करवा रहे हैं। ऐसे में तथ्यों की पुष्टि किए बिना भ्रामक वीडियो वायरल करना गैर-जिम्मेदाराना कदम है, जिससे पुलिस बल का मनोबल भी प्रभावित होता है।
विभाग ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी संवेदनशील वीडियो या जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें।
फिर भी उठे संवेदनशीलता को लेकर सवाल
हालांकि पूरे मामले के बीच कुछ लोगों ने यह सवाल भी उठाया है कि यदि वास्तव में कोई गर्भवती महिला या मरीज इलाज के लिए ले जाया जा रहा होता, तो क्या उस परिस्थिति में चालानी कार्रवाई उचित होती? कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों का मानना है कि ऐसी स्थितियों में पुलिस को मानवीय और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
इसी को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग भी उठने लगी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मौके पर वास्तविक स्थिति क्या थी और वायरल वीडियो किस उद्देश्य से फैलाया गया।
पुलिस ने जांच के दिए संकेत
ट्रैफिक पुलिस ने साफ किया है कि वायरल वीडियो में किए गए दावे गलत हैं और पूरे घटनाक्रम को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया गया है। विभाग अब इस बात की भी जांच चाहता है कि वीडियो किसने बनाया, किसने उसे भ्रामक दावों के साथ वायरल किया और इसके पीछे मंशा क्या थी।
पुलिस का कहना है कि यातायात नियमों का पालन करवाना जनहित और सड़क सुरक्षा से जुड़ा विषय है तथा ऐसे अभियानों को बदनाम करने की कोशिशों पर निगरानी रखी जाएगी।

