मेडिकल शिक्षा में शोध को मिली नई दिशा सिम्स में दो दिवसीय पीजी ओरिएंटेशन एवं रिसर्च मेथोडोलॉजी कार्यशाला सम्पन्न…
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़] छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर में सत्र 2025-26 में प्रवेशित एमडी/एमएस प्रथम वर्ष के स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए 23 एवं 24 अप्रैल को दो दिवसीय ओरिएंटेशन एवं रिसर्च मेथोडोलॉजी कार्यशाला का सफल एवं सुव्यवस्थित आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नवप्रवेशित चिकित्सकों को अस्पताल की कार्यप्रणाली, क्लीनिकल जिम्मेदारियों एवं शोध आधारित चिकित्सा पद्धति के प्रति जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम का आयोजन बायोकेमिस्ट्री लेक्चर हॉल (तृतीय तल) में किया गया, जिसमें विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यवहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया।
पहले दिन (23 अप्रैल) आयोजित ओरिएंटेशन सत्र में डीन डॉ. रमणेश मूर्ति एवं डॉ. चंद्रहास ध्रुव ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए चिकित्सा सेवा में अनुशासन, संवेदनशीलता एवं जिम्मेदारी के महत्व पर प्रकाश डाला।
डॉ. चंद्रहास ध्रुव द्वारा मरीज के भर्ती से लेकर डिस्चार्ज तक की संपूर्ण प्रक्रिया को विस्तार से समझाया गया।
डॉ. आशुतोष कोरी ने इमरजेंसी में त्वरित निर्णय, प्राथमिक उपचार एवं जीवनरक्षक प्रक्रियाओं की जानकारी दी, वहीं डॉ. संजय घिल्ली ने ट्रायज प्रणाली के माध्यम से मरीजों की प्राथमिकता निर्धारण की तकनीक को स्पष्ट किया।
डॉ. विद्या भूषण साहू ने काउंसलिंग एवं सूचित सहमति के महत्व को बताते हुए मरीज एवं परिजनों के साथ प्रभावी संवाद स्थापित करने के तरीकों पर प्रकाश डाला।
डॉ. राहुल अग्रवाल ने मेडिको-लीगल मामलों में चिकित्सकों की कानूनी जिम्मेदारियों एवं दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।
दोपहर सत्र में विभागवार सैंपल कलेक्शन की वैज्ञानिक प्रक्रिया पर प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें डॉ. मनीष साहू (बायोकेमिस्ट्री) ने नमूनों के सही संग्रह, लेबलिंग एवं स्टोरेज की प्रक्रिया बताई, डॉ. रेखा बरापात्रे (माइक्रोबायोलॉजी) ने संक्रमण संबंधी सैंपल में एसेप्टिक तकनीक की आवश्यकता समझाई,
डॉ. शहनाज़ बानो (पैथोलॉजी) ने ऊतक एवं साइटोलॉजिकल नमूनों के संरक्षण एवं जांच प्रक्रिया पर प्रकाश डाला,
डॉ. अमन अग्रवाल (रेडियोडायग्नोसस
ने इमेजिंग से पूर्व मरीज की तैयारी एवं सुरक्षा के मानकों को समझाया।
इसके अतिरिक्त, डॉ. सागरिका प्रधान ने बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट एवं पोस्ट एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस पर जानकारी देते हुए अस्पताल में संक्रमण नियंत्रण एवं सुरक्षा मानकों की महत्ता बताई।
डॉ. श्रेया टोड़ी ने प्रिस्क्रिप्शन राइटिंग एवं फार्माकोलॉजिकल ऑडिट पर व्याख्यान देते हुए सुरक्षित एवं तार्किक दवा उपयोग की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।
दूसरे दिन (24 अप्रैल) आयोजित रिसर्च मेथोडोलॉजी कार्यशाला में डीन डॉ.रमणेश मूर्ति ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में शोध की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो नई उपचार पद्धतियों के विकास एवं स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार का आधार है।
इस अवसर पर विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा शोध के विभिन्न पहलुओं पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई।
डॉ. केशव कश्यप ने प्रभावी रिसर्च प्रश्न तैयार करने की तकनीक एवं शोध की आधारभूत संरचना को समझाया।
डॉ. मोनिका साहू ने साहित्य समीक्षा की प्रक्रिया एवं शोध की गुणवत्ता बढ़ाने में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला।
डॉ. विवेक शर्मा ने अवलोकनात्मक अध्ययन डिजाइन के प्रकार एवं उपयोगिता को स्पष्ट किया।
डॉ. श्रेया तोदी ने हस्तक्षेपात्मक अध्ययन (क्लीनिकल ट्रायल) की संरचना एवं वैज्ञानिक पद्धति को सरल रूप में समझाया।
डॉ. सचिन पांडे ने सैंपल साइज निर्धारण एवं अध्ययन की विश्वसनीयता के संबंध को उदाहरण सहित प्रस्तुत किया।
डॉ. सुचिता सिंह ने डेटा कलेक्शन के सिद्धांतों पर चर्चा करते हुए डेटा की शुद्धता एवं प्रबंधन की आवश्यकता बताई। डॉ. मधुमिता मूर्ति ने नैतिक अनुसंधान सिद्धांत, सूचित सहमति एवं प्लेजरिज्म से बचाव के महत्वपूर्ण पहलुओं पर जोर दिया।
डॉ. सुपर्णा गांगुली ने रिसर्च प्रोटोकॉल लेखन की चरणबद्ध प्रक्रिया को समझाते हुए विद्यार्थियों को व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान किया।
कार्यक्रम के अंत में पोस्ट टेस्ट एवं फीडबैक सत्र आयोजित किया गया तथा विद्यार्थियों को स्किल लैब का भ्रमण भी कराया गया।
अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों में शोध के प्रति रुचि एवं आत्मविश्वास विकसित करते हैं। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने इसे संस्थान में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में आईसीयू सदस्य सचिव डॉ. मधुमिता मूर्ति, छात्र शाखा प्रभारी डॉ. सारिका प्रधान, एस.आर.आर.सी. की सचिव डॉ. सुपर्णा गांगुली सहित सभी विभागों के चिकित्सकों एवं स्टाफ का सराहनीय योगदान रहा:-
यह कार्यशाला सिम्स बिलासपुर में मेडिकल शिक्षा को शोध-आधारित, व्यावहारिक एवं गुणवत्ता पूर्ण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुई।

