चेम्बर अध्यक्ष सतीश थौरानी के बयान पर सोनी ने रखा अपना पक्ष कहा…
पद छोड़ा है, उद्देश्य नहीं समान प्रतिनिधित्व और संतुलित नेतृत्व की लड़ाई जारी रहेगी…
बिलासपुर-{जनहित न्यूज़}
बिलासपुर छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की बिलासपुर में हुई कार्यकारिणी बैठक के बाद संविधान संशोधन और अपने इस्तीफे को लेकर चेम्बर अध्यक्ष सतीश थौरानी द्वारा दिए गए बयानों पर बिलासपुर संभाग कार्यकारी अध्यक्ष एवं संविधान संशोधन समिति के सदस्य रहे कमल सोनी ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि पिछले करीब डेढ़ वर्ष से संविधान में संशोधन को लेकर लगातार पत्राचार और निवेदन किए जाते रहे हैं, लेकिन इस दिशा में अपेक्षित पहल नहीं हुई। अब भी मामले को केवल आमसभा के अधिकार का विषय बताकर आगे बढ़ने से रोका जा रहा है।
कमल सोनी ने कहा कि आमसभा को संविधान संशोधन पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार है, लेकिन किसी प्रस्ताव को आमसभा तक पहुंचाने के लिए संगठन की निर्धारित प्रक्रिया का पालन भी जरूरी है। उनके अनुसार, संविधान संशोधन का विषय पहले कार्यकारिणी के समक्ष रखा जाना चाहिए और उसके बाद नियमानुसार आमसभा में चर्चा एवं निर्णय के लिए ले जाया जाना चाहिए। ऐसे में उनका सवाल है कि लंबे समय से उठाए जा रहे इस विषय को कार्यकारिणी के माध्यम से आमसभा तक पहुंचाने में आखिर आपत्ति क्यों है।
ड्राफ्ट तैयार नहीं हुआ कहना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं:-
सोनी ने अध्यक्ष के उस कथन पर भी सवाल उठाया, जिसमें संविधान संशोधन का ड्राफ्ट तैयार नहीं होने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि संविधान संशोधन का ड्राफ्ट तैयार है और इसकी जानकारी 6 अगस्त को भेजे गए पत्र में भी दी गई थी। हालांकि, इसे प्रदेश कार्यकारिणी के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि अब इस ड्राफ्ट को छत्तीसगढ़ चेम्बर की सभी 22 इकाइयों तक ले जाकर व्यापक राय ली जाएगी, ताकि संविधान संशोधन के मुद्दे पर प्रदेशभर के व्यापारियों की वास्तविक भावना सामने आ सके।
रायपुर में व्यापारी अधिक हैं।
तर्क पर भी उठाए सवाल:-
कमल सोनी ने चेम्बर में प्रतिनिधित्व को लेकर क्षेत्रीय संतुलन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि चेम्बर एक राज्य स्तरीय संगठन है और इसकी जिम्मेदारी पूरे छत्तीसगढ़ के व्यापारियों के प्रति समान रूप से होनी चाहिए। केवल संख्या के आधार पर किसी एक क्षेत्र को अधिक महत्व देना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि संगठन में क्षेत्रवाद के बजाय संतुलित नेतृत्व, समान प्रतिनिधित्व और सभी क्षेत्रों की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि किसी क्षेत्र की व्यापारी संख्या अधिक है, तो इसका अर्थ यह नहीं होना चाहिए कि अन्य क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व और समस्याओं को कम महत्व मिले।
बिलासपुर के विकास के मुद्दों को लेकर भी जताई चिंता
सोनी ने बिलासपुर के एससीआर (SCR) और इंडस्ट्रियल पार्क जैसे महत्वपूर्ण विषयों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मुद्दों को लेकर पूर्व में पत्र और ज्ञापन दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास की योजनाओं में क्षेत्रीय संतुलन पर समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि दुर्ग से राजनांदगांव तक विकास की जरूरत महसूस की जा सकती है, तो रायपुर से बिलासपुर तक के विकास की आवश्यकता को भी उसी दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। उन्होंने चेम्बर के सभी पदाधिकारियों से एकजुट होकर बिलासपुर सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े व्यापारिक एवं औद्योगिक मुद्दों को मजबूती से उठाने का आग्रह किया।
पद छोड़ा है, उद्देश्य नहीं:-
कमल सोनी ने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष या किसी क्षेत्र के विरोध में नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य पूरे छत्तीसगढ़ में समान नेतृत्व, समान प्रतिनिधित्व और संतुलित विकास सुनिश्चित करना है।
उन्होंने कहा…
मैंने पद से त्यागपत्र दिया है, लेकिन अपने उद्देश्य से पीछे नहीं हटा हूं। संविधान संशोधन, संगठन में संतुलित प्रतिनिधित्व और प्रदेशभर के व्यापारियों के हितों को लेकर मेरा प्रयास आगे भी जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संगठन में असहमति का उद्देश्य संगठन को कमजोर करना नहीं, बल्कि उसे अधिक मजबूत, पारदर्शी और संतुलित बनाना होना चाहिए।

