
सदन में उठा कोण्डागांव की कस्टम मिलिंग का मुद्दा, खाद्यमंत्री ने दिया खरा जवाब
04-मार्च,2021
रायपुर-{जनहित न्यूज़} विधानसभा में आज कोण्डागांव जिले में धान की कस्टम मिलिंग का मुद्दा उठाया गया। कांग्रेस विधायक संतराम नेताम द्वारा उठाये इस मुद्दे पर भाजपा सदस्यों ने खाद्य मंत्री को घेरने का प्रयास किया।
प्रश्रकाल में आज कांग्रेस विधायक संतराम नेताम ने यह मामला मंत्री से पूछा कोंडागांव में खरीफ वर्ष 2019-20 और 2020-21 में समर्थन मूल्य में कितना धान खरीदा गया तथा पुराने धान का उठाव क्यों नहीं हुआ और मिलिंग क्यों नहीं करायी गयी।
इसके जवाब में खाद्यमंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि 2019-20 में 1,44,677 टन धान और 2020-21 में 1,43,463 टन धान की खरीदी की गयी। कस्टम मिलिंग के लिए 94,938 टन धान के विरूद्ध 63,808 टन राईस मिलरों द्वारा जमा कराया गया। 2020-21 में 18 जनवरी में 20,256 टन धान के विरूद्ध अनुपातिक चावल 13,574 टन चावल में से 10,595 टन जमा कराया गया।
विधायक संतराम नेताम ने पूछा कि शेष धान की मिलिंग क्यों नहीं करायी गयी, जिसके जवाब में खाद्य मंत्री ने कहा कि केन्द्र से अनुमति देर से मिली और उसना चावल की मिलिंग क्षमता कम है। इसलिए उसना को अरवा में कन्वर्ट करके स्टेट मिलिंग के जरिए जमा कराया जा रहा है। संतराम नेताम ने कहा कि रखरखाव के अभाव में धान खराब हो रहा है।
नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि पुराना धान खराब हो रहा है। यह राष्ट्रीय क्षति है। कस्टम मिलिंग होना चाहिए। उन्होंने मंत्री से पूछा कि कस्टम मिलिंग का आदेश केन्द्र से कब हुआ कब तक मिलिंग करना था। उन्होंने कहा कि मैं वहां देखकर आया हूं वहां चावल नहीं है राख हो गया है।
इसके जवाब में खाद्य मंत्री ने कहा कि सामान्य: केन्द्र से अनुमति सितंबर 19 में मिलना था लेकिन पहला आदेश देर से 19 दिसंबर को मिला फिर जून में मिला। इस तरह चार बार तारीख बढ़ाई गई। नेताप्रतिपक्ष ने इस पर कहा कि अनुमति मिलने के बाद भी साढ़े 9 माह में जमा नहीं कर पायी। डीईओ नहीं काटा गया और धान सड़ गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पहली सरकार है जो सरकार का चावल को चुना लगा रहे है।
नगरीय प्रशासन मंत्री शिवकुमार डहरिया ने इस पर कहा कि इसकी वजह केन्द्र सरकार से देर से मिली अनुमति है। धरमलाल कौशिक ने कहा कि सरकार की नीति के कारण भारी राष्ट्रीय क्षति हुई है इसलिए इस मामले की जांच होनी चाहिए। भाजपा सदस्य अजय चंद्राकर ने भी मंत्री से पूछा कि क्या वे शेष रखे धान की क्वालिटी का सत्यापन करायेंगे।
नेताप्रतिपक्ष ने इस मामले की जांच सदन की कमेटी से कराये जाने की मांग आंसदी से की।
कांग्रेस विधायक संतराम नेताम ने भी मंत्री से पूछा कि क्या रखा हुआ धान कस्टम मिलिंग की स्थिति में है, अगर नहीं तो इस मामले में जिम्मेदारों पर कार्यवाही करेंगे।
खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने नेताप्रतिपक्ष की बात सुनने के बाद कहा कि भाजपा नेता ने धान के मामले में चिंता जाहिर की अच्छा लगा, लेकिन वे वास्तव में चिंता करते तो भारत सरकार को चि_ी लिखते। उन्होंने अब तक एक भी चि_ी नहीं लिखी है। खाद्य मंत्री ने कहा कि हम लोग परेशान रहते है कि किसानों का धान खरीदे, समय पर कस्टम मिलिंग हो लेकिन भाजपा के लोग सिर्फ घडिय़ाली आंसू बहाना और भाषण करना जानते है। उन्होंने कहा कि किसानों के हित के यदि वे समर्थक हैं तो केंद्र को एक चिट्ठी लिखने में क्या दिक्कत हैं।
इस पर विधानसभा अध्यक्ष डा. चरणदास महंत ने खाद्य मंत्री से कहा कि इसके लिए वे व्यक्तिगत रूप से नेताप्रतिपक्ष से मिलकर भारत सरकार के लिए चिट्ठी लिखा ले।

