पश्चिम बंगाल में
रक्तपात पर अंकुश लगाने में पूरी तरह से विफल हुई केन्द्र सरकार
05-मई,2021
अमरकंटक-{जनहित न्यूज़} “राजनीति” को छोड़कर अब “कुटिलनीति” पर उतारू हुए राजनेता, अपनों की जान गवांकर यदि लाज बचानी पड़े तो अधोपतन के चरम पर जा रही हैं राजनीतिक पार्टियां
अमरकंटक/ अनूपपुर जिले के मां नर्मदा के पावन भूमि पर रह कर एक पवित्र विचारधारा से अभिसिंचित होकर मां नर्मदा की कृपा से जनसेवा का बीड़ा उठाने के बाद मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश सचिव जैसे बड़े पद की शोभा बढ़ाने के बाद, परम धर्म सांसद जैसे गरिमामयी पद पर आसीन होने के बाद और साथ ही हाई कोर्ट जबलपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता होने के बाद श्रीधर शर्मा ने आज एक बहुत ही संवेदनशील बात कही है कि जनता के हित और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा जाना चाहिए और इसके आगे यदि कोई पार्टी या पद का बंधन आड़े आए तो एक राजनेता को राजधर्म का साथ देना चाहिए और आम जनता और राष्ट्रहित से बड़ा कोई राजधर्म नहीं है।
आज पूरा देश कोरोनाकाल में अपने घरों में कैद है और इस महामारी की हिंसक मार झेल रहा है और लाखों परिवार भुखमरी की कगार पर खड़े हैं लेकिन इसके बीच भी इस महामारी की भयावहता को दरकिनार कर केंद्र की निकम्मी सरकार ने बंगाल सहित अन्य जगहों पर चुनाव को प्राथमिकता दी और देश की भोली भाली जनता इनकी स्वार्थपरता से अनभिज्ञ होकर इनके रैलियों और सभाओं की शोभा बढ़ाकर आज चुनाव को परिणाम तक पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाई। आज एक राजनीतिक दल का बंगाल में राजतिलक हो रहा है और दूसरी ओर एक अन्य राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं के साथ खून की होली खेली जा रही है लेकिन केंद्र सरकार इन “नींव की ईंट” के रूप में अपने जीवन की आहुति देने वाले ज़मीनी कार्यकर्ताओं और नेताओं के लिए क्या कर रही है? केंद्र सरकार केवल अपनी छवि की स्वच्छता बनाने और साबित करने में लगी रहती है, जबकि पश्चिम बंगाल में आए दिन राजनीतिक कार्यकर्ताओ का कत्लेआम होता रहा है। आज बी जे पी कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है और यह कुछ नया नहीं है अपितु पिछले 10 वर्षों से बंगाल का इतिहास रहा है कि वहाँ बदले की कार्यवाही में कांग्रेस के कई सिपाही कम्युनिस्ट के कार्यकर्ताओं की निर्मम हत्याएं होती रही है। आज केंद्र में ऐसे सरकार की आवश्यकता है जो कि इस प्रकार संविधान की धज्जियाँ उड़ाने वालों और सरेआम कत्ल करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही करने की हिम्मत दिखाए न कि अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए इस प्रकार से राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं की आहुति देने के लिए छोड़ दे। आज कहां है नागरिकों के स्वतंत्रता से जीने और समानता का अधिकार, आज संविधान के अनुच्छेद 21 का सरेआम उल्लंघन हो रहा है, कार्यकर्ता किसी दल के हों, वो पहले हमारे देश के नागरिक हैं और उनके जान-माल की सुरक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी होती है। आज प्रधानमंत्री को चाहिए कि पश्चिम बंगाल में तत्काल राष्ट्रपति शासन लगाकर निर्दोष नागरिकों की हो रही निर्मम हत्याओं पर अंकुश लगाने के लिए कदम उठाएं। इस प्रकार के रक्तपात की घोर निंदा करते हुए उन्होंने कहा कि निःसन्देह तृणमूल के मूल में भीषण रक्तपात छिपा हुआ है, परंतु केंद्र सरकार का मौन रहना,इस निर्मम हत्या के लिए जिम्मेदार है। विपक्षी दल आज कांग्रेस की निंदा कर रहा है जो कि संभवतः उचित है, लेकिन कांग्रेस की सरकारों ने स्वयं को दांव में लगाकर राष्ट्रपति शासन लगाकर हमेशा ऐसी असमाजिक तत्वों से लड़ाई लड़ी है। आज किसान आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार की चुप्पी भी भविष्य में देश को महंगी पड़ेगी। किसान आंदोलन के आड़ में खालिस्तानी विचारधारा देश में जड़ मजबूत कर रही है। यदि ऐसा ही चलता रहा तो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का बलिदान निर्रथक हो जाएगा, इंदिरा जी मजबूत इरादों की प्रधानमंत्री थी उन्होंने कभी ऑपरेशन ब्लू स्टार करने या निर्वाचित सरकार को भंग करने में कभी देर नही की, इसीलिए उन्हें “आयरन लेडी” कहा जाता रहा है। आज मोदी खुद की छवि उदारवादी बनाने के चक्कर मे न केवल अपने कार्यकर्ताओं की बलि चढ़ा रहे हैं, बल्कि देश विरोधी ताकतों को मजबूत भी कर रहे हैं। यह बात आज नही तो कल भाजपा का एक एक कार्यकर्ता समझ जाएगा और उन्हें कार्यकर्ता खोजने में निराशा हाथ लगेगी। अफसोस इस बात का है कि तब तक देश कमजोर हो चुका होगा।आपने केंद्र सरकार से यह मांग की है कि अतिशीघ्र निर्णय लेकर पश्चिम बंगाल के रक्तपात पर अंकुश लगाएं, चाहे इसके लिए ममता सरकार को भंग ही क्यों न करना पड़े।


