अपनी जमीन के लिए दर-दर भटक रहा कोटवार
16-अगस्त 2021
बिलासपुर-{जनहित न्यूज़} बिलासपुर में इन दिनों भू-माफियाओं का दबदबा बड़े जोरों पर है किसी की भी जमीन को सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करके अपने नाम करा लेना इनके लिए महज एक खेल बन गया है।
जमीन का असली मालिक एड़ी-चोटी का जोर लगाने के बाद भी अपनी जमीन से वंचित हो जाता है, यही हाल रहा तो आने वाले समय में नगर की मलाईदार जमीन इन भू-माफिया के पाले में आ जाएगी और जमीन का असल मालिक दर-दर भटकने मजबूर हो जाएगा।
ऐसा ही एक मामला सामने आया है जिसमे साकिन तालापारा के कोटवार मालिक राम पिता पुनीराम निवासी तालपारा की जमीन को कथिक रसूखदार ने जबरिया अपने कब्जे में ले लिया है तथा उक्त जमीन को घेर कर अपना गोडाउन बनाकर उसका उपयोग कर रहे हैं।

ज्ञात हो कि विगत कई वर्षो से कोटवार मालिक राम अपनी जमीन को पाने के लिए संघर्षरत रहा है परंतु उस गरीब कोटवार की कोई नही सुन रहा है। कोटवार मालिकराम को कोटवारी में उक्त जमीन 1.38 एकड़ भूमि मालगुजार द्वारा उनके पूर्वजों को कोटवारी में दी गई थी, जो कि अब भू-माफिया रसूखदार ने हथिया ली है और असल जमीन मालिक अपनी जमीन पाने के लिए दर-दर भटक रहा है।

मामला कुछ ऐसा है कि तालापारा साकिन कोटवार के पूर्वजों को उक्त जमीन कोटवारी में मालगुजार द्वारा दी गई थी। तथा असल मालिक को उक्त जमीन पर जब पता लगा की उसकी जमीन पर कथिक लोगो ने कब्जा कर लिया है, तब उन्होंने पूर्व पटवारी लच्छन राम से उक्त जमीन पर अवैध कब्जे बाबत गुहार लगाई तो पटवारी ने उक्त जमीन का एक हिस्सा 76 डिसमिल रोड नक्शे में आने पर अधिग्रहण करना बताया, बाकी बची 62 डिसमिल जमीन के एवज में दोमुहानी गांव में तब्दील करना बताया और फिर कोटवार मालिकराम ने वर्तमान पटवारी से इस बाबत चर्चा की तो इन्होंने भी वही कहानी दोहरा दी। अब सवाल यह उठता है कि यदि रोड नक्शे में जमीन का शासन द्वारा अधिग्रहण किया गया तो उक्त जमीन का मुआवजा किसे दिया गया..? और ना ही अधिग्रहण करने के पूर्व जमीन के असल मालिक कोटवार मालिक राम को इसकी सूचना दी गई!
अब यहाँ पर खेल सीधा मिली भगत का लगता है क्योंकि शासन यदि किसी की व्यक्तिगत जमीन का सरकारी कार्य हेतु अधिग्रहण करती है तो नियमानुसार उस व्यक्ति को अधिग्रहण से पूर्व उसे सूचित करता है तथा जमीन का शासकीय दर पर मुवायजा भी दिया जाता है।
और इस मामले में दोनो नियमो का पालन नहीं किया गया !

गौर करने वाली बात यह भी है कि शासकीय ऐप्प भुईया पर ऑनलाइन जांच करने पर ऑन रिकार्ड खसरा न. 253 रकबा 1.38 भूमि जो मालिकाना हक 0.76 एकड़ शेष दर्शाया जा रहा है।
उस गरीब कोटवार को तो पता ही नही चला कि कब उसकी कीमती जमीन को एक भू-माफ़िया की झोली में डाल दिया गया!
खेल पूरा ही मिली भगत का नजर आ रहा है। अब इस मामले में जमीन मालिक कोटवार मालिक राम ने अपनी जमीन को कब्जा धारियों के चंगुल से छुड़ाने व कानूनी कार्यवाही करने राजस्व मंत्री,कमिशनर, बिलासपुर कलेक्टर,
अनुविभागीय अधिकारी,{राजस्व} अनुविभाग बिलासपुर तथा तहसीलदार से उक्त मामले को संज्ञान में लेते हुए कथिक भू-माफिया पर कार्रवाई करने की तथा उक्त जमीन को वापिस दिलाने गुहार लगाते हुए लिखित आवेदन देते हुए न्याय की गुहार लगाई है।
यहां एक जानकारी यह भी मिली है कि उक्त जमीन से लगी हुई रसूखदार कथित अवैध कब्जाधारी की जमीन भी है और यही एक कारण रहा कि उस गरीब की जमीन पर रसूखदार की गिद्ध दृष्टि पड़ी और उसने अपने बाहुबली होने का नाजायज फायदा उठाते हुए उक्त गरीब कोटवार मालिकराम की जमीन को अपनी जमीन में विलय करवा लिया है।
अब यह सांठगांठ किससे हुई कब हुई यह जानकारी तो खुफिया तंत्र द्वारा ही बताई जा सकती है पर क्या उक्त जमीन अब इस गरीब को मिलेगी या नहीं यह देखने वाली बात है।

