रतनपुर के रक्षक कोतवाल सिद्ध तंत्र पीठ में मनाई जाएगी भगवान काल भैरव जयंती
26 नवंबर 2021
बिलासपुर-{जनहित न्यूज़} रतनपुर बिलासपुर राजमार्ग में रतनपुर के प्रवेश द्वार पर दाहिनी ओर सिद्ध तंत्र पीठ भगवान श्री काल भैरव नाथ जी का विशाल ऐतिहासिक मंदिर स्थित है, जो हजारों लाखों लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है ,इस मंदिर में विराजित भैरव नाथ जी की 12 फीट की विशाल प्रतिमा स्थापित है, जो शायद ही कहीं इतनी अधिक ऊंचाई की भैरव नाथ की मूर्ति विश्व में कहीं होगी ।यह एक ऐसी अद्वितीय मूर्ति है जो सभी को अचंभित कर देती है, इस 12 फीट की विशाल प्रतिमा को देखकर दर्शनार्थी दांतो तले उंगली दबा लेते हैं। जिसका पूरा दर्शन बैठकर या फिर सिर झुकाकर करने पर ही होता है । क्योंकि भैरवनाथ की इतनी अधिक विशाल प्रतिमा पूरे भारतवर्ष में शायद ही कहीं पर होगी । भैरव बाबा को नगर का रक्षक व कोतवाल भी माना जाता है ,जो हजारों वर्षों से इस पुरातन व पौराणिक नगरी की रक्षा कर रहे हैं, इस मंदिर के संबंध में आज भी ऐसी मान्यता है, कि जो भी ग्रामीण किसान साग सब्जी रतनपुर बाजार में बेचने के लिए लाते हैं, उसका पहला फल इस भैरव बाबा मंदिर में जरूर अर्पित करते हैं।
वरना ऐसा विश्वास है कि उनकी सब्जी पीली पड़ जाती है। शायद तुलसीदास जी ने सच ही कहा है “भय बिन प्रीत न होई गुसाईं”।
बताया जाता है कि परिवार में होने वाले समस्त मांगलिक कार्यों में इनकी पूजा आराधना अवश्य की जाती है ,जिससे परिवार में सुख समृद्धि और खुशहाली आती है। भगवान काल भैरव की पूजा पाठ करने से सभी प्रकार के भय का नाश होता है। तथा शत्रु पर विजय प्राप्त होती है , व मुकदमे में जीत तथा भूत प्रेत बाधा ,जादू टोना आदि के प्रभाव से मुक्ति मिलती है। भैरव बाबा के संबंध में कहा जाता है कि मां महामाया के दर्शन पूजन के पश्चात भैरव बाबा का दर्शन अनिवार्य माना जाता है और यही कारण है कि महामाया के प्रांगण में भी भैरव बाबा की प्रतिमा प्रतिस्थापित है।
धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव को ही भैरव का अवतार माना जाता है भगवान शिव के ग्यारहवें अवतारों में से भैरव को पांचवा अवतार माना गया है । इसके अलावा धार्मिक मान्यता के अनुसार कि स्कंद पुराण के काशी खंड में भैरवोदभव का आख्यान आता है, जिसमें ब्रह्मा जी द्वारा वरदान दिया गया है, कि भैरवनाथ समस्त जगत का भरण पोषण करने का सामर्थ रखते हैं। शायद इसीलिए इनका नाम भैरव पड़ा होगा। तथा उनसे काल का भी भय समाप्त हो जाता है, जिससे कि वह काल भैरव के नाम से विख्यात होंगे ।भैरव नाथ की महिमा में भैरवस्तवराज में उल्लेख है
“सर्वपापहरम पुण्यं सर्वापति निवारणम।
सर्वकामार्थदम भैरवं साधकानां सुखावहम।।
आयुष्करम पुष्टिकरं श्रीकर च यशस्करम।।
भैरो बाबा के दिव्य स्वरूप के बारे में माना जाता है कि वह श्याम वर्ण के हैं, तथा नर मुंड की माला गले में धारण किए हुए हैं। और यह 12 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा रौद्र भाव से परिपूर्ण है। तथा नाना प्रकार के अलंकरण से सुसज्जित है,
और यह विशाल चार भुजाओं से सुशोभित है। तथा इनके हाथों में त्रिशूल खड्ग और खप्पर लिए हुए हैं ।श्री काल भैरव जी को श्मशान वासी भी माना जाता है, तथा इनका वाहन स्वान को कहा गया है। भैरवनाथ को इन आठ नामों से भी जाना जाता है। इसीलिए इन्हें अष्ट भैरव भी कहा जाता है, जिनमें चंड भैरव ,भयंकर भैरव, कपाली भैरव, काल भैरव, रूद्र भैरव, क्रोधोन्मत्त भैरव, अतिसंग भैरव आदि नामों से इन्हें जाना जाता है।
रतनपुर के भैरव बाबा मंदिर को पहले इसे तंत्र साधना का केंद्र माना जाता था ।और यहां बहुत ही अधिक तंत्र मंत्र की क्रियाएं व तांत्रिक अनुष्ठान होते थे ,जागृत तंत्र पीठ होने से भक्तों के जीवन में एक नई ऊर्जा शक्ति मिलती है जिससे व्यवसाय उद्योग धंधे वह समस्त प्रकार के टोना टोटका , प्रेतबाधा आदि से मुक्ति मिलती है।
इस मंदिर में प्रतिवर्ष भैरव जन्मोत्सव बड़ा ही उल्लास के साथ मनाया जाता है, जिसमें आज मार्ग शीर्ष अष्टमी को भैरव जन्मोत्सव के दौरान पूरे मंदिर परिषर को बड़े ही आकर्षक साजसज्जा के साथ भैरव नाथ का विशेष श्रृंगार किया जाएगा, जो अत्यंत ही नयनाभिराम रहता है, जिसकी एक झलक पाने की खातिर श्रद्धालुओं का सैलाब यहां उमड़ पड़ता है, इस मंदिर में पूरे एक सप्ताह तक नियमित चलने वाली महोत्सव के दौरान यहां विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे , जिसमें मुख्य रुप से श्री भैरव नाथ जी का राजयोग पूजा, सामूहिक विवाह, श्री रुद्र महायज्ञ, उपनयन संस्कार तथा बालोद से आए हुए रामलीला मंडली द्वारा रामलीला का भी भव्य आयोजन होगा, इस मंदिर द्वारा प्रत्येक वर्ष धर्मार्थ एवं समाज कल्याण के लिए समय-समय पर विशेष कार्यक्रम किए जाते रहे हैं, इसी कड़ी में इस वर्ष भी धर्म रक्षा, गौ रक्षा, व प्रदेश की खुशहाली के लिए श्री रुद्र महायज्ञ में विशेष आहुति दिए जाएंगे, इसके अलावा ग्रह दोष निवारण तथा इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान सिद्ध तंत्र पीठ भैरव बाबा मंदिर के प्रमुख पुजारी पंडित जागेश्वर अवस्थी के द्वारा ग्रह दोष निवारण के लिए भी विशेष आहुति दिए रहे है वहीँ आचार्य पं गिरधारी लाल
दिलीप दुबे पांडये राजेंद्र दुबे अनीश मिश्रा महेश्वर पाण्डेय कान्हा तिवारी दीपक अवस्थी आदि पूजन में जुटे हुए है




