विश्वविद्यालय कुलपति ने एनएसयूआई से की मुलाकात चर्चा में भ्रष्टाचार वित्तीय गड़बड़ियों औरभर्ती अनियमितताओं पर सौंपे दस्तावेज राज्यपाल के नाम ज्ञापन जांच व दोषियों पर कार्रवाई की मांग का दिया आश्वासन…!
बिलासपुर-{जनहित न्यूज़} बिलासपुर अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में लगातार सामने आ रही प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ एनएसयूआई के छात्रों का 13 दिनों से जारी विरोध प्रदर्शन आखिरकार रंग लाया। छात्रों के दबाव और जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद आज विश्वविद्यालय प्रशासन हरकत में आया और कुलपति डॉ. अरुण दिवाकर नाथ वाजपेयी ने एनएसयूआई प्रतिनिधिमंडल को चर्चा के लिए आमंत्रित किया।

कुलपति से आधे घंटे चली अहम चर्चा एनएसयूआई प्रदेश सचिव रंजेश सिंह के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधियों ने कुलपति से विश्वविद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार, टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी, वित्तीय अनियमितता और अवैध भर्तियों से जुड़े तमाम दस्तावेज सौंपे। प्रतिनिधियों ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन प्रस्तुत कर निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की।
टेंडर और वित्तीय गड़बड़ियों के गंभीर आरोप
रंजेश सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय में नियमों को ताक पर रखकर बिना टेंडर कार्य आदेश जारी किए गए। मुंबई की एक निजी कंपनी को 50 लाख रुपये का अग्रिम भुगतान किया गया, जबकि उसी कार्य के लिए बाद में भोपाल की एक अन्य कंपनी को करोड़ों का भुगतान कर दिया गया। यह सब उस स्थिति में किया गया जब इस प्रक्रिया पर पहले ही ऑडिट आपत्ति दर्ज हो चुकी है।
न्यायालय में लंबित भर्तियों में भी की गई नियुक्तियां छात्र प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन भर्तियों को भी पूर्ण कर लिया है जो वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन हैं। कुलपति ने इस पर जवाब देते हुए कहा कि न्यायालय के आदेश के बाद उन भर्तियों को रद्द किया जाएगा।

आरक्षण रोस्टर में भारी अनियमितता स्वीकारा कुलपति ने आरक्षण रोस्टर की अनदेखी को कुलपति ने एक बड़ा मामला मानते हुए इसे गंभीर चूक बताया, बावजूद इसके भर्ती प्रक्रिया को पूरा कर लिया गया। प्रतिनिधियों ने इस पर तीखी आपत्ति जताते हुए इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग रखी।
प्रमोशन और प्रभार में नियमों की अनदेखी
एनएसयूआई ने बताया कि एक ग्रेड-3 के कर्मचारी को नियमों के विपरीत ग्रेड-1 का प्रभार दे दिया गया है, वहीं एक सहायक कुलसचिव को उप कुलसचिव के पद पर बिना प्रक्रिया के पदोन्नत किया गया है। साथ ही, पिछले चार वर्षों से वार्षिक बजट के नाम पर कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों को अतिरिक्त मानदेय भी दिया गया, जिसकी कोई विधिवत स्वीकृति नहीं है।
ज्ञान पथ में प्रचार के लिए विश्वविद्यालय निधि के दुरुपयोग का आरोप
एनएसयूआई ने कुलपति पर विश्वविद्यालय की छवि के बजाय व्यक्तिगत प्रचार में धन खर्च करने का आरोप लगाया। ‘ज्ञान पथ’ में स्वतंत्रता सेनानियों और महान विचारकों की जगह कुलपति के विचार और फोटो युक्त कैलेंडर लगाए गए हैं, जो अनुचित है। साथ ही शासन के निर्देशों के बावजूद निजी फर्मों से पोस्टर-बैनर छपवाने को भी नियम विरुद्ध बताया गया।
स्थायी कुलसचिव की मांग
एनएसयूआई ने विश्वविद्यालय में स्थायी कुलसचिव की नियुक्ति के लिए शासन को तत्काल पत्र लिखने की मांग की है, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
ज्ञापन सौंपने वाले प्रमुख छात्र प्रतिनिधि:
रंजेश सिंह, पुष्पराज साहू, प्रदीप सिंह, करण यादव, सुमित ठाकुर और मीत सोनवानी।
एनएसयूआई की चेतावनी
छात्र प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि यदि जल्द जांच शुरू नहीं हुई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। विश्वविद्यालय में पारदर्शिता और छात्रहितों की रक्षा के लिए यह संघर्ष जारी रहेगा।


