नगर निगम की असंवेदनशीलता…
बुलडोजर के शोर में दब गईं रोते-गिड़गिड़ाते बच्चों की चीखें…परिणाम कैंसर पीड़ित बच्चे की मौत…!
बिलासपुर-{जनहित न्यूज़} लिंग्याडीह
विकास की रफ्तार ने फिर एक गरीब की ज़िंदगी रौंद दी। नगर निगम की बेरहम अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई ने एक कैंसर पीड़ित मासूम की सांसें छीन लीं। लिंग्याडीह-चिंगराजपारा इलाके में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर निगम का बुलडोजर उस घर पर चला, जहां 6 साल का बच्चा ज़िंदगी और मौत के बीच लड़ाई लड़ रहा था।
उस समय माता-पिता उसे इलाज के लिए रायपुर ले गए थे, लेकिन पीछे रह गए दो मासूम भाई-बहन प्रशासन की बेरुख़ी के आगे कुछ न कर सके। रोते-गिड़गिड़ाते बच्चों की चीखें बुलडोजर के शोर में दब गईं।

निगम की टीम ने बिना संवेदना दिखाए पूरे मकान को ढहा दिया। उस मकान के मलबे में दब गया एक गरीब परिवार का सपना, और तिनका-तिनका करके जोड़ी गई उम्मीदें।
आज वह कैंसर पीड़ित बच्चा दुनिया को अलविदा कह गया।
इलाज अधूरा रह गया, जीवन अधूरा रह गया लेकिन सबसे बड़ा सवाल अधूरा रह गया: क्या इंसानियत अब सरकारी फाइलों में भी दम तोड़ चुकी है?
बच्चे की मौत की खबर जैसे ही मोहल्ले में फैली, शोक और आक्रोश की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने बच्चे का शव लेकर कलेक्ट्रेट का रुख किया।

आंखों में आंसू और हाथों में इंसाफ की मांग लिए लोग सड़कों पर उतर आए। “ग़रीब की जान की कोई कीमत नहीं?” यह सवाल हर चेहरे पर दर्ज था।

पीड़ित पिता संतोष यादव की आंखों में अब आंसू ही नहीं, भरोसे का भी सूखा पड़ा है। वे बताते हैं, “हमें बस एक कमरे की सूचना दी गई थी, लेकिन पूरा मकान गिरा दिया गया। अब हमारा बच्चा भी चला गया… हम कहां जाएं?”
प्रशासन की नींद तब टूटी जब आक्रोशित लोग कलेक्ट्रेट पहुंच गए।

कलेक्टर संजय अग्रवाल ने मौके पर पहुंचकर जांच और सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावित परिवार को आर्थिक मदद और रहने की बेहतर व्यवस्था दी जाएगी।

लेकिन क्या एक बच्चे की मौत की भरपाई किसी मुआवज़े से हो सकती है?
क्या प्रशासन संवेदनशील विकास की दिशा में कदम बढ़ाएगा या फिर यही कहानी किसी और गरीब की जिंदगी में दोहराई जाएगी?
आज यह सिर्फ एक संतोष यादव का दुख नहीं, यह उस पूरे तंत्र का चेहरा है जो विकास की अंधी दौड़ में इंसानियत को रौंदता चला जा रहा है।


