रेलवे स्टेशन के समीप भटकती
अज्ञात महिला को परिवार तक सुरक्षित पहुँचाया…!
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़]
छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर में मानवता, संवेदनशीलता और सामाजिक समन्वय का एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है, जहाँ चिकित्सा सेवा केवल इलाज तक सीमित न रहकर एक असहाय बेटी को उसके परिवार तक सुरक्षित पहुँचाने का माध्यम बनी।
दिनांक 10 नवंबर 2025 को दोपहर लगभग 3 बजे रेलवे स्टेशन के समीप भटकती अवस्था में मिली लगभग 20 वर्षीय एक अज्ञात महिला को 108 एम्बुलेंस सेवा के माध्यम से सिम्स चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। महिला की स्थिति अत्यंत गंभीर थी और वह अपने बारे में कोई जानकारी देने की स्थिति में नहीं थी।
सिम्स के मेडिसिन विभाग के चिकित्सकों ने मानवीय संवेदना के साथ निरंतर उपचार, देखभाल और सहयोग प्रदान किया, जिससे महिला की तबीयत में धीरे-धीरे सुधार हुआ और वह पूर्णतः स्वस्थ हो गई।
स्वस्थ होने के बाद महिला ने अपने घर का पता अधूरा बताया। इस संबंध में सिम्स प्रशासन द्वारा तत्काल चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह एवं अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति को अवगत कराया गया। उनके मार्गदर्शन में महिला को परिजनों से मिलाने की सामाजिक प्रक्रिया प्रारंभ की गई।
इस क्रम में सिम्स के सोशल वर्कर आशुतोष शर्मा द्वारा दिनांक 19 दिसंबर 2025 को महिला हेल्पलाइन 181 पर प्रकरण दर्ज कराया गया। इसके पश्चात सखी वन स्टॉप सेंटर, नूतन चौक, बिलासपुर की केंद्र समन्वयक मीनाक्षी पांडे द्वारा मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्यवाही की गई।
महिला द्वारा बताए गए सीमित पते के आधार पर झारखंड राज्य के सखी वन स्टॉप सेंटर से संपर्क स्थापित किया गया। समन्वय के माध्यम से महिला के परिजनों तक सूचना पहुंची, जिसके बाद महिला के पिता मोहन महतो, निवासी परसुडीह, जिला पूर्वी सिंहभूम (झारखंड) बिलासपुर पहुंचे और सभी आवश्यक औपचारिकताओं के पश्चात आज अपनी पुत्री को सकुशल अपने साथ घर ले गए।
इस पूरे मानवीय प्रयास में सिम्स चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ. नवनीत अग्रहरि, डॉ. मिलिंद, डॉ. बुरहानुद्दीन फीडवी, डॉ. चंद्रशेखर; नर्सिंग स्टाफ कावेरी, सिस्टर कनकलता यादव, सिस्टर मधुलिका, सिस्टर अंजू साहू, सिस्टर प्रतीक्षा, सिस्टर अंकिता; हाउसकीपिंग स्टाफ रामा तथा सखी वन स्टॉप सेंटर की टीम मीनाक्षी पांडे (केंद्र समन्वयक) सावित्री यादव, ललिता खांडेकर, सरोजिनी धीवर एवं भुऊदेशी कार्यकर्ता का सराहनीय योगदान रहा।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा,सिम्स में आने वाले प्रत्येक असहाय और अज्ञात मरीज की जिम्मेदारी हम पूरी संवेदनशीलता से निभाते हैं। यह प्रकरण दर्शाता है कि चिकित्सा, प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं के समन्वय से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।
अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा,
स्वास्थ्य सेवा केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीज की सामाजिक सुरक्षा और पुनर्वास भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सिम्स की टीम एवं सखी वन स्टॉप सेंटर के सहयोग से एक बेटी अपने परिवार तक सुरक्षित लौट सकी, यह हमारे लिए गर्व का विषय है।
सखी वन स्टॉप सेंटर की केंद्र समन्वयक मीनाक्षी पांडे ने बताया,
सखी वन स्टॉप सेंटर का उद्देश्य संकटग्रस्त महिलाओं को त्वरित सहायता, संरक्षण और पुनर्वास प्रदान करना है। सिम्स प्रशासन, महिला हेल्पलाइन 181 और झारखंड सखी सेंटर के बेहतर समन्वय से यह मामला सफलतापूर्वक सुलझ पाया।
यह घटना प्रमाण है कि सिम्स चिकित्सालय और सखी वन स्टॉप सेंटर मिलकर न केवल चिकित्सा सेवा, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और पुनर्वास की दिशा में भी एक सशक्त और प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं।

