रामकथा के दौरान संत प्रवर विजय कौशल महाराज ने भगवान श्रीराम के विवाह प्रसंग का किया अभूतपूर्व वर्णन…!
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़]
नगर में आयोजित रामकथा के दौरान संत प्रवर विजय कौशल महाराज ने भगवान श्रीराम के विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण और जीवंत वर्णन कर श्रद्धालुओं को सनातन धर्म की गहराई से साक्षात्कार कराया। स्वयंवर में धनुष भंग की अलौकिक लीला से लेकर जनकपुर में राम-जानकी विवाह तक, प्रत्येक प्रसंग में मर्यादा, विनम्रता और दिव्य कर्तव्यबोध का संदेश निहित रहा।
महाराज ने कहा कि भगवान की क्रिया भले ही दृष्टिगोचर न हो, किंतु उसका परिणाम सदैव जगत के कल्याण के रूप में प्रकट होता है। परशुराम जी का क्रोध भगवान श्रीराम की शालीनता और आत्मीय व्यवहार से शांत हो जाना इसी मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप का प्रमाण है। रामविवाह का संदेश पाकर राजा दशरथ के नेत्रों से बहे आनंदाश्रु, पूर्ण सुख की अनुभूति का प्रतीक बने।

कथा में बेटी और पिता के निश्छल संबंधों पर प्रकाश डालते हुए महाराज ने कहा कि भारत बेटियों का देश है, जहाँ बेटियाँ पिता के सुख-दुःख की सच्ची संवाहक होती हैं। इस मार्मिक प्रसंग ने विशेषकर महिला श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
जनकपुर को जानकी जी द्वारा बैकुंठ स्वरूप प्रदान करने, देवताओं के ब्राह्मण वेश में विवाह मंडप में उपस्थित होने और गुरु वशिष्ठ द्वारा विवाह विधि संपन्न कराने का वर्णन सुनकर पूरा पंडाल भक्ति और उल्लास से गूंज उठा।

राम-जानकी के सिंदूरदान और कन्यादान के समय जनक-सुनयना के अश्रु, सनातन परंपरा की करुणा और गरिमा को दर्शाते रहे। बारात विदाई से लेकर अयोध्या में चारों बहुओं के भव्य स्वागत तक, कथा ने आदर्श पारिवारिक मूल्यों और राज्य संचालन में त्याग-बोध का संदेश दिया।
महाराज ने राम के उस भाव को रेखांकित किया, जिसमें वे सत्ता की जिम्मेदारी भरत को सौंपने की इच्छा प्रकट करते हैं।यह सनातन धर्म में कर्तव्य और विनम्रता का सर्वोच्च उदाहरण है।

कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य संरक्षक अमर अग्रवाल, श्रीमती शशि अग्रवाल, पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष नारायण चंदेल, विधायक धरमलाल कौशिक सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों ने स्वागत किया। समापन पर अमर अग्रवाल परिवार द्वारा आरती की गई। भक्ति, संस्कार और सनातन आस्था से ओतप्रोत यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए बना अविस्मरणीय पल।

