अनिश्चितकालीन हड़ताल हुई शुरू पहले दिन से ही दिखे सख्त तेवर…!
रायपुर-{जनहित न्यूज़}
रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ राज्य में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के अधिकारी एवं कर्मचारी अपनी लंबित वेतन विसंगति, अपूर्ण वेतन भुगतान और वैधानिक सेवा-लाभों की बहाली की मांग को लेकर 23 फरवरी 2026 से अनिश्चितकालीन कामबंद हड़ताल एवं धरना-प्रदर्शन पर बैठ गए हैं। आज आंदोलन का पहला दिन रहा।
इससे पूर्व संघ ने 16 से 20 फरवरी तक पाँच दिवसीय कामबंद हड़ताल की थी और विश्वविद्यालय प्रशासन से स्पष्ट, लिखित एवं समयबद्ध समाधान की अपेक्षा की थी। लेकिन निर्धारित अवधि में कोई ठोस निर्णय नहीं आने पर संघ ने आंदोलन को अनिश्चितकालीन रूप देने का निर्णय लिया।
वार्ता रही बेनतीजा, जिम्मेदारी टालता रहा प्रशासन हड़ताल अवधि के दौरान संघ प्रतिनिधिमंडल और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच कई दौर की चर्चा हुई। आरोप है कि कुलपति स्तर पर विषय को कभी राज्यपाल, कभी राज्य शासन और कभी वित्त विभाग से जोड़कर टालने की कोशिश की गई। परिणामस्वरूप कोई क्रियान्वयन योग्य लिखित निर्णय सामने नहीं आया। केंद्रीय निर्देशों और न्यायालयीन आदेशों की अनदेखी का आरोप संघ का कहना है कि KVK कर्मचारियों के वेतन एवं सेवा-लाभों के संबंध में पूर्व से स्पष्ट केंद्रीय निर्देश मौजूद हैं, जिनमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के 1997 के मूल निर्देश अनुसार 75% (Pay+DA+HRA) अंशदान परिषद द्वारा तथा शेष 25% दायित्व मेजबान संस्था का होना,
भारत सरकार के कृषि मंत्रियों एवं सचिव स्तर के पत्र तथा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का 24 जून 2025 का स्थगन आदेश एवं 7 अगस्त 2025 को विश्वविद्यालय द्वारा जारी अनुपालन पत्र शामिल हैं।
इनके बावजूद आज तक पूर्ववत वेतन एवं भत्तों का भुगतान सुनिश्चित नहीं किया गया है, जिसे संघ न्यायालयीन आदेश की अवहेलना के समान मान रहा है।
भ्रामक प्रेस विज्ञप्ति पर कड़ी आपत्ति
संघ ने विश्वविद्यालय द्वारा जारी पूर्व प्रेस विज्ञप्ति में ICAR के 75% अंशदान को 100% बताकर विश्वविद्यालय के 25% वैधानिक दायित्व से बचने के प्रयास को तथ्यात्मक रूप से असत्य एवं भ्रामक बताया है।

किसानों पर पड़ रहा असर
National Forum of KVK & AICRP के अध्यक्ष डॉ. मनोज शर्मा ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि KVK की हड़ताल का सीधा प्रभाव किसानों, कृषि विस्तार सेवाओं और राज्य की कृषि व्यवस्था पर पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि KVK के अधिकारी-कर्मचारी विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी हैं, न कि ICAR की, और उनके वेतन व सेवा-लाभों की पूर्ण जवाबदेही मेजबान विश्वविद्यालय की है।
संघ का स्पष्ट रुख संघ ने दोहराया है कि… आंदोलन पूर्णतः शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक है। कर्मचारियों के सम्मान और वैधानिक अधिकारों पर समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।
हड़ताल से उत्पन्न प्रशासनिक, शैक्षणिक एवं प्रसारगत अव्यवस्था की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।
संघ ने कुलपति एवं विश्वविद्यालय प्रशासन से तत्काल लिखित निर्णय लेकर KVK कर्मचारियों के पूर्ण वेतन और सभी सेवा-लाभ बहाल करने की मांग की है, ताकि आंदोलन समाप्त हो और किसानों को पुनः निर्बाध सेवाएं मिल सकें।

