हेराफेरी में संलिप्तता के पांच कर्मचारियों को बैंक प्रबंधक ने किया तत्काल सस्पेंड…! बैंक ने लौटाई शासकीय राशि…!
चंडीगढ़-{जनहित न्यूज़}
विशेष रिपोर्ट…!
चंडीगढ़ स्थित IDFC FIRST Bank की एक शाखा में करीब 590 करोड़ रुपये के वित्तीय घोटाले का मामला सामने आया है। इस कथित हेरा-फेरी का शिकार हरियाणा सरकार के कई विभाग बने। हालांकि राज्य सरकार ने दावा किया है कि अधिकांश राशि बैंक द्वारा वापस कर दी गई है और मामले की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी गई है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, बैंक की चंडीगढ़ शाखा में हरियाणा सरकार के प्रदूषण नियंत्रण विभाग, पंचायत विभाग, पंचकुला नगर निगम और कालका नगर परिषद के खाते संचालित थे।
प्रदूषण विभाग ने अपना एक खाता बंद कर राशि सरकारी बैंक में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया। ट्रांसफर के दौरान पाया गया कि खाते में दर्ज बैलेंस और वास्तविक राशि में भारी अंतर है।
जांच आगे बढ़ी तो खुलासा हुआ कि चार सरकारी खातों से कुल 590 करोड़ रुपये की हेरा-फेरी की गई थी।
सरकार की त्वरित कार्रवाई
मामला उजागर होते ही मुख्यमंत्री नायाब सिंह सैनी ने तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए।
IDFC फर्स्ट बैंक में संचालित सभी सरकारी खाते बंद करने का आदेश
शेष राशि को सरकारी बैंकों में ट्रांसफर करने के निर्देश वित्त सचिव की अध्यक्षता

में जांच समिति का गठन मुख्यमंत्री ने बताया कि 556 करोड़ रुपये मूलधन और 22 करोड़ रुपये ब्याज सहित कुल राशि सरकारी खातों में वापस आ चुकी है।
बैंक की सफाई और कार्रवाई
बैंक की ओर से जारी लिखित बयान में कहा गया कि…!
करीब 583 करोड़ रुपये 24 घंटे के भीतर संबंधित विभागों को लौटा दिए गए।
प्रारंभिक जांच में शाखा के कुछ कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आई है।
पांच कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया है।
मामले की सूचना भारतीय रिजर्व बैंक को दे दी गई है।

राज्य सरकार की जांच एजेंसियों को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया गया है।
उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित
हरियाणा सरकार ने वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरुण गुप्ता सहित चार सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है, जो यह पता लगाएगी कि…
राशि कैसे निकाली गई?
सिस्टम में कहां चूक हुई?
किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका रही..? विपक्ष के आरोप
विपक्षी दलों ने इसे “सिस्टम की बड़ी विफलता” बताते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि मामले में उच्च स्तर की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता।

बैंक का स्वामित्व
IDFC FIRST Bank एक निजी क्षेत्र का सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध बैंक है, जिसका स्वामित्व मुख्यतः पब्लिक और संस्थागत निवेशकों के पास है। बैंक के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ V. Vaidyanathan हैं, जिन्होंने कैपिटल फर्स्ट और आईडीएफसी बैंक के विलय के बाद 2018 में इसकी कमान संभाली थी।
भरोसे पर असर?
हालांकि सरकार को राशि वापस मिल चुकी है, लेकिन इतने बड़े वित्तीय अनियमितता के खुलासे ने बैंकिंग सिस्टम और सरकारी निगरानी तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह स्पष्ट करेगी कि यह मामला केवल शाखा स्तर तक सीमित था या इसके तार कहीं और तक जुड़े हैं।

