शेयर ट्रेडिंग के नाम पर देशभर में फैला था जाल बड़ा खुलासा 4 गिरफ्तार करोड़ों के लेनदेन के मिले सुराग…!
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़]
बिलासपुर मोबाइल स्क्रीन पर शेयर ट्रेडिंग से मोटे मुनाफे का सपना दिखाकर लोगों की गाढ़ी कमाई लूटने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का बड़ा खुलासा बिलासपुर साइबर पुलिस ने किया है। एक महिला से 17.21 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी की जांच करते-करते पुलिस ऐसे नेटवर्क तक पहुंच गई, जिसके बैंक खातों के तार देशभर में हुए करोड़ों रुपये के साइबर अपराधों से जुड़े मिले हैं।
रेंज साइबर थाना बिलासपुर की जांच में सामने आया कि आरोपी केवल एक-दो लोगों को नहीं, बल्कि ऑनलाइन निवेश और शेयर ट्रेडिंग के नाम पर विभिन्न राज्यों में लोगों को निशाना बनाने वाले संगठित साइबर सिंडिकेट का हिस्सा थे। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में मिले बैंकिंग रिकॉर्ड और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के आंकड़ों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
17 लाख की शिकायत से खुला करोड़ों के खेल का राज
मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र के नर्मदा नगर का है, जहां एक महिला को शेयर बाजार में निवेश कर कम समय में भारी मुनाफा कमाने का लालच दिया गया। खुद को निवेश विशेषज्ञ बताने वाले ठगों ने महिला का विश्वास जीतकर अलग-अलग चरणों में 17 लाख 21 हजार 100 रुपये ट्रांसफर करा लिए। रकम वापस नहीं मिलने और संपर्क टूटने पर पीड़िता ने साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
बिहार से रायपुर तक फैला नेटवर्क, चार आरोपी गिरफ्तार
तकनीकी साक्ष्यों, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में मुकेश कुमार दास (समस्तीपुर, बिहार), केशव साव (रायगढ़), संदीप कुमार चंद्रा उर्फ विक्की (सक्ती) और शिशिर राठौर (सक्ती, वर्तमान निवास रायपुर) शामिल हैं।
जांच में खुलासा हुआ कि साइबर ठगी से प्राप्त रकम को विभिन्न बैंक खातों के जरिए प्राप्त कर आगे ट्रांसफर किया जाता था, जिससे पूरे नेटवर्क की पहचान छिपाई जा सके।
कई राज्यों में दर्ज मिली शिकायतें
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) से प्राप्त जानकारी के अनुसार आरोपी संदीप कुमार चंद्रा के खाते के खिलाफ गुजरात, तेलंगाना, कर्नाटक और दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों में पांच साइबर शिकायतें दर्ज हैं।
वहीं मुख्य आरोपी मुकेश कुमार दास के तीन बैंक खातों में कुल 13 साइबर फ्रॉड शिकायतें सामने आईं। इनमें इंडसइंड बैंक खाते में 3, एक्सिस बैंक खाते में 6 और इंडियन ओवरसीज बैंक खाते में 4 शिकायतें दर्ज पाई गईं।
8 करोड़ रुपये के संदिग्ध ट्रांजेक्शन के मिले सुराग
साइबर जांच के दौरान सबसे बड़ा खुलासा बैंकिंग ट्रेल से हुआ। पुलिस के अनुसार आरोपियों के खातों से जुड़े मामलों में लगभग 8 करोड़ रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के सुराग मिले हैं। जांच में यह भी सामने आया कि मुख्य आरोपी के खातों में साइबर ठगी से संबंधित लगभग 10 लाख रुपये सीधे प्राप्त हुए थे।
खातों में लाखों रुपये फ्रीज
पुलिस ने जांच के दौरान आरोपियों के बैंक खातों में बड़ी रकम होल्ड कराई है। केशव साव के एक्सिस बैंक खाते में लगभग 99 लाख रुपये और शिशिर राठौर के खाते में करीब 1 लाख रुपये की राशि रोकी गई है। प्रारंभिक जांच में इन खातों का उपयोग साइबर ठगी की रकम के लेनदेन और ट्रांसफर के लिए किए जाने की पुष्टि हुई है।
शेयर ट्रेडिंग बना साइबर ठगों का नया हथियार
हाल के वर्षों में शेयर ट्रेडिंग, आईपीओ, मल्टीबैगर स्टॉक और हाई रिटर्न स्कीम के नाम पर ऑनलाइन ठगी के मामलों में तेजी आई है। इस मामले में भी निवेश पर भारी मुनाफे का लालच देकर पीड़िता को रकम ट्रांसफर करने के लिए प्रेरित किया गया। जांच एजेंसियों को आशंका है कि गिरफ्तार आरोपी ऐसे बड़े नेटवर्क से जुड़े हैं, जिसके तार देश के कई राज्यों तक फैले हुए हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में कार्रवाई
पूरी कार्रवाई पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह, नोडल अधिकारी गगन कुमार एवं थाना प्रभारी प्रसाद सिन्हा के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। कार्रवाई में निरीक्षक कामिल हक, प्रधान आरक्षक सैयद साजिद, सहायक उपनिरीक्षक जीवन साहू, वरिष्ठ आरक्षक भानु प्रताप, दीपक यादव, दीपक कौशिक, विजेंद्र मरकाम, चिरंजीव एवं मुकुंद नेताम की महत्वपूर्ण भूमिका रही, एक नजर में।
शेयर ट्रेडिंग के नाम पर 17.21 लाख रुपये की ठगी

बिलासपुर साइबर पुलिस ने 4 आरोपियों को किया गिरफ्तार मुख्य आरोपी के खातों से जुड़े मिले 13 साइबर फ्रॉड केस कई राज्यों में दर्ज शिकायतों का खुलासा करीब 8 करोड़ रुपये के संदिग्ध ट्रांजेक्शन सामने आए।
1 करोड़ रुपये के आसपास की राशि खातों में होल्ड
NCRP डेटा से अंतरराज्यीय साइबर नेटवर्क का खुलासा क्राइम एंगल
17 लाख रुपये की एक शिकायत से शुरू हुई जांच ने करोड़ों रुपये के साइबर नेटवर्क की परतें खोल दीं। बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजेक्शन और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के रिकॉर्ड ने संकेत दिए हैं कि शेयर ट्रेडिंग के नाम पर ठगी करने वाला यह गिरोह केवल एक राज्य तक सीमित नहीं था, बल्कि देशभर में फैले एक बड़े साइबर सिंडिकेट का हिस्सा हो सकता है।

