मरीज की तबीयत बिगड़ने पर उसे तत्काल वापस अपोलो लाकर चिकित्सकों ने उसकी स्थिति को किया स्थिर…!
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़]
एयर एंबुलेंस से मरीज को हैदराबाद भेजे जाने के दौरान सामने आए घटनाक्रम को लेकर कुछ समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों पर अपोलो अस्पताल प्रबंधन ने अपना पक्ष जारी किया है। अस्पताल का कहना है कि मरीज को गंभीर अवस्था में दूसरे अस्पताल से अपोलो लाया गया था और भर्ती होते ही उसे तत्काल आपातकालीन चिकित्सा उपलब्ध कराई गई।
प्रबंधन के अनुसार मरीज बायलैटरल निमोनिया, रेस्पिरेटरी फेलियर एवं स्वाइन फ्लू संक्रमण से पीड़ित था। गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे आईसीयू में भर्ती कर पहले एनआईवी सपोर्ट तथा बाद में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया।
अस्पताल ने बताया कि उपचार के एक-दो दिन बाद मरीज के परिजनों ने स्वयं उसे उच्च स्तरीय उपचार के लिए दूसरे शहर ले जाने का निर्णय लिया और एयर एंबुलेंस की व्यवस्था भी स्वयं की। अपोलो प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि उस समय तकनीकी खराबी के कारण अस्पताल की एंबुलेंस उपलब्ध नहीं थी, जिसकी जानकारी परिजनों को पहले ही दे दी गई थी। इसके बाद परिजनों ने बाहरी एंबुलेंस की व्यवस्था की।
प्रबंधन ने समाचार पत्रों में प्रकाशित उस आरोप को भी खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि मरीज को ले जाने से पहले एंबुलेंस के उपकरणों की जांच नहीं की गई। अस्पताल के अनुसार इमरजेंसी में पदस्थ चिकित्सक ने एंबुलेंस में मौजूद उपकरणों का निरीक्षण किया था और उन्हें सुचारू रूप से कार्यरत पाया था। साथ ही परिजनों को यह भी बताया गया था कि बाहरी एंबुलेंस के उपकरण अस्पताल के उपकरणों से अलग हैं और उनका संचालन एंबुलेंस के तकनीशियन द्वारा ही किया जाएगा।
अस्पताल के मुताबिक एंबुलेंस के तकनीशियन ने आईसीयू में पहुंचकर मरीज को लगे उपकरणों के अनुरूप एंबुलेंस के उपकरण सेट किए, जिसके बाद मरीज को एंबुलेंस में शिफ्ट किया गया। प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया कि अस्पताल की नीति के अनुसार बाहरी एंबुलेंस के साथ अपोलो का मेडिकल स्टाफ उपलब्ध नहीं कराया जाता और इसकी जानकारी भी परिजनों को पहले ही दे दी गई थी।
प्रबंधन के अनुसार एयरपोर्ट पहुंचने पर मरीज की तबीयत बिगड़ने पर उसे तत्काल वापस अपोलो अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसकी स्थिति को स्थिर किया। अगले दिन आवश्यक चिकित्सकीय सपोर्ट के साथ मरीज को पुनः एयरपोर्ट भेजा गया।
अपोलो अस्पताल का कहना है कि पूरे घटनाक्रम के दौरान मरीज के परिजनों को सभी परिस्थितियों और व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई थी। इसलिए कुछ समाचार पत्रों में लगाए गए आरोप तथ्यहीन और निराधार हैं।

