व्यापारी सहित हर वर्ग को हो रही लेनदेन में परेशानी से सरकार को कराया अवगत
08-मई,2021
बैकुंठपर-{जनहित न्यूज़}
छत्तीसगढ़ शासन की संसदीय सचिव अम्बिका सिंहदेव ने बैंक लेनदेन शूरू करने की मांग की है। कोरिया जिले में 11 अप्रैल से प्रभावी लॉकडाउन की अवधि तीसरे चरण में बढ़ाकर आगामी 16 मई की मध्य रात्रि तक कर दी गई है। इस बार भी बैंकों में सामान्य लेन देन की अनुमति नहीं दी गयी है। अपने खाते से पैसे निकालने पर रोक लगी हुई है, जिससे आमजन बेहद नाराज हैं।संसदीय सचिव व क्षेत्रीय विधायक अंबिका सिंहदेव ने कलेक्टर कोरिया को पत्र लिखकर बैंको मेंआमजनों के सामान्य रूप से नकदी लेन देन करने की अनुमति प्रदान करने की मांग कीहै। 11 अप्रैल 2021 से कोरिया जिले में लॉकडाउन लगा है। जिसके बाद शुरूआत के कुछ दिन तो बैंक पोस्ट आफिस भी पूरी तरह से बंद रहे लेकिन कुछ दिन बाद बैंक व पोस्ट आफिस केा प्रातः 10 से दोपहर 1 बजे तक कोरोना प्रोटोकाल का पालन करते हुए खोलनें की अनुमति दी गयी लेकिन किसी भी तरह के सामान्य लेन देन पर रोक लगा दी गई। सिर्फ मेडिकल इमरजेंसी में दस्तावेज प्रस्तुत करने पर ही लेन देन करने की अनुमति है इसके अलावा किसी भी आमजन को बैंकिंग सेवा नहीं दी जा रही है। दूसरी ओर पूरे जिले के ग्रामीण क्षेत्रो के गरीब लोग इससे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं और साधारणजन को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों की परेशानियों को देखते हुए संसदीय सचिव श्रीमती अंबिका सिंहदेव ने कलेक्टर से मांग की है कि जल्द ही आमजनों को नकदी लेन देन करने की अनुमति प्रदान की जाये।
इस बीच मजदूरी भुगतान, पेंशन भुगतान की अनुमति दी गयी है लेकिन इसके बावजूद भी लोगों की शिकायत है कि उनकी मजदूरी की राशि भी बैंकों द्वारा इस दौरान भुगतान नही की जा रही है। ग्रामीण दूर दराज से लॉकडाउन के दौरान किसी तरह बैंकेां तक पहुंचत रहे हैं केकिन उन्हें नियमों का हवाला देकर उनकी मेहनत की राशि भी देने से साफ इंकार किया जा रहा है। यही हाल पेंशन प्रकरणों का भी है। ग्रामीण क्षेत्र के बुजुर्ग अपने क्षेत्र के बैंकों के साथ जिला मुख्यालय के बैंक में अपनी पेंशन राशि लेने के लिए बडी मुश्किल से पहुंच रहे है और जब बैंक में पहुंचते हैं तो उन्हे अभी रुपये देने से मना किया जा रहा है। ऐसे में अपनी ही मजदूरी राशि व पेंशन की राशि लिये बिना ही ग्रामीण घर लौट रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान लोगों की परेशानी को कोई नहीं समझ रहा है। अधिकारी आदेश तो जारी कर दिये है लेकिन आदेशों का कितना पालन हो रहा है ।

