प्रतियोगी परीक्षा में संस्कार और जिम्मेदार नागरिक बनने एसपी ने दिए छात्रों को टिप्स…
मुंगेली-{जनहित न्यूज़}
मुंगेली जिले में शिक्षा, संस्कार और सुरक्षा को एक सूत्र में पिरोने वाली ‘पहल 2.0’ पहल के तहत पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल (भा.पु.से.) ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि पुलिस केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के उज्ज्वल भविष्य की सहभागी भी है। विकासखंड लोरमी अंतर्गत शासकीय कोतरी माध्यमिक हायर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों के मन में आत्मविश्वास, लक्ष्य और सामाजिक जिम्मेदारी की नई ऊर्जा भर दी।

आयोजित इस भव्य एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम में विद्यालय के लगभग 650 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। स्वयं उपस्थित पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए यूपीएससी, पीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं, शैक्षणिक विषयों और जीवन मूल्यों पर मार्गदर्शन दिया।

जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, भौतिक शास्त्र, राजनीति विज्ञान जैसे विषयों से पूछे गए प्रश्नों के उत्तर विद्यार्थियों ने पूरे आत्मविश्वास से दिए, जिससे कार्यक्रम ज्ञानवर्धक के साथ-साथ अत्यंत रोचक बन गया।

भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों पर आधारित प्रश्नों के माध्यम से विद्यार्थियों को संस्कारों से जोड़ते हुए श्री पटेल ने रामचरितमानस के प्रसंगों का उल्लेख किया। भगवान श्रीराम के 14 वर्षों के वनवास पर विद्यार्थियों के भावनात्मक और सारगर्भित उत्तरों ने यह सिद्ध किया कि आज की पीढ़ी संस्कार और कर्तव्य के महत्व को भली-भांति समझती है।
कार्यक्रम के दौरान सक्रिय सहभागिता करने वाले छात्र-छात्राओं को नकद पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया, जिससे विद्यार्थियों में आत्मबल और आगे बढ़ने की प्रेरणा और मजबूत हुई।

कार्यक्रम के अंतिम सत्र में बिलासपुर की काउंसलर श्रीमती शैलजा स्वामी, पुलिस अधिकारी शत्रुहन खूंटे एवं साइबर सेल से बबीता श्रीवास ने विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा, यातायात नियमों, नशा मुक्ति (विशेषकर ब्राउन शुगर जैसे घातक नशों) तथा युवा सशक्तिकरण जैसे विषयों पर जागरूक किया। वक्ताओं ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे सजग, अनुशासित और कानून का सम्मान करने वाले नागरिक बनें।

विद्यालय के शिक्षकगण, छात्र-छात्राएं एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ यह आयोजन एसपी भोजराम पटेल की दूरदर्शी सोच और संवेदनशील पुलिसिंग का जीवंत उदाहरण बना। ‘पहल 2.0’ को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, सुरक्षित भविष्य और सकारात्मक समाज निर्माण की दिशा में एक प्रेरक और अनुकरणीय कदम के रूप में देखा जा रहा है।


