बिलासपुर-[जनहित न्यूज़]
कलिकाल में तपस्या और कठिन साधना की आवश्यकता नहीं, केवल प्रभु के नाम का स्मरण ही भवसागर पार कराने में सक्षम है इसी गूढ़ संदेश के साथ आठ दिवसीय रामकथा का आज भव्य समापन हुआ। सुप्रसिद्ध कथावाचक संत श्री विजय कौशल महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि लोग प्रभु के नाम की महिमा को नहीं जानते। कलियुग में नाम ही आधार है, यदि कोई एक नाम का भी निरंतर स्मरण करता रहे, तो उसका कल्याण निश्चित है।

रामकथा के अंतिम दिवस प्रातः 10 बजे कथा प्रारंभ हुई, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। संत श्री ने श्रीराम के चरित्र का विस्तार से वर्णन करते हुए लंका युद्ध, अंगद-रावण संवाद, सेतु निर्माण, संजीवनी प्रसंग, कुंभकर्ण-वध और अंततः रावण संहार तक की कथा को भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया।

उन्होंने बताया कि युद्ध से पूर्व प्रभु श्रीराम ने शांति का प्रयास करते हुए अंगद जी को रावण के पास समझौते के लिए भेजा, किंतु अहंकार में डूबे रावण ने उसे ठुकरा दिया। समुद्र तट पर रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना कर प्रभु श्रीराम ने यह संदेश दिया कि धर्म और मर्यादा सर्वोपरि है। नल-नील द्वारा सेतु निर्माण और हनुमान जी द्वारा रामनाम की महिमा से पत्थरों का तैरना यह प्रसंग नाम की शक्ति को दर्शाता है।

लक्ष्मण मूर्छा, संजीवनी बूटी, भरत-हनुमान मिलन, कुंभकर्ण का अहंकार और अंततः अग्निबाण से रावण वध इन सभी प्रसंगों में संत श्री ने भक्ति, त्याग, सेवा और धर्म की श्रेष्ठता को रेखांकित किया। रावण वध के पश्चात विभीषण का राजतिलक और प्रभु श्रीराम का अयोध्या आगमन श्रद्धालुओं को भावविभोर कर गया।

अयोध्या वापसी के प्रसंग में प्रभु श्रीराम द्वारा केवट से मिलन, माता कैकयी से भेंट, भरत के प्रति स्नेह और राजतिलक का वर्णन करते हुए संत श्री ने कहा कि राजा वही होता है जो स्वयं को जनता का सेवक माने।

कथा विश्राम के पश्चात रामकथा के मुख्य संरक्षक अमर अग्रवाल ने नगरवासियों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में अमर अग्रवाल, श्रीमती शशि अग्रवाल, आदित्य अग्रवाल, सिमरन अग्रवाल, महेश अग्रवाल सहित महाराष्ट्र मंडल एवं वंदेमातरम मंडल द्वारा स्वागत किया गया। समापन अवसर पर बृजमोहन अग्रवाल, पूजा विधानी, लखन लाल साहू, संतोष कौशिक, सुरेश गोयल सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

रामनाम की महिमा, भक्ति और संस्कृति के संदेश के साथ रामकथा का यह आयोजन नगरवासियों के लिए अविस्मरणीय बन गया।

