बिलासपुर-{जनहित न्यूज़}
बिलासपुर तोरवा निवासी स्व भगतराम डोडेजा की धरमपत्नी श्रीमती लीला देवी डोडेजा का मंगलवार को स्वर्गवास हो गया। उनके पुत्र सुरेश व भतीजे अमित डोडेजा ने नेत्रदान हेतु हैंड्स ग्रुप से सम्पर्क किया , हैंड्स ग्रुप से अमित डोडेजा व अन्य सदस्य सिम्स के नेत्रदान सल्हाकर धर्मेंद्र देवांगन डॉक्टर संजय चौधरी व डॉ रवि यादव की टीम के साथ उनके निवास स्थान जा कर नेत्रदान किया।
अब भी कई लोग इंतज़ार में है , जिसमें बच्चे भी शामिल है। कोई नेत्रदान करे तो उनके जीवन में ज्योत जले नेत्रदान से जुड़ी कुछ जानकारी यह जानकर बहुत ही प्रेरणा मिलती है कि किसी ने नेत्रदान (Eye Donation) करने का संकल्प लिया है या नेत्रदान किया है। यह मानवता के लिए सबसे बड़े उपहारों में से एक है, क्योंकि एक व्यक्ति का नेत्रदान दो नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में उजाला ला सकता है।
यदि नेत्रदान की प्रक्रिया अभी होनी है या आप इसके बारे में जानकारी चाहते हैं, तो यहाँ कुछ महत्वपूर्ण बातें दी गई हैं।
नेत्रदान से जुड़ी जरूरी जानकारी
समय का महत्व: मृत्यु के 4 से 6 घंटे के भीतर ही नेत्रदान हो जाना चाहिए।
प्रक्रिया: नेत्रदान की प्रक्रिया में केवल 10-15 मिनट लगते हैं और इससे चेहरे पर कोई विकृति नहीं आती।
कौन कर सकता है: किसी भी उम्र का व्यक्ति (बच्चा हो या बुजुर्ग), चश्मा पहनने वाला, या जिसे मधुमेह (Diabetes) या उच्च रक्तचाप (BP) हो, वह भी नेत्रदान कर सकता है।
गोपनीयता: दान करने वाले और प्राप्त करने वाले, दोनों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।
तुरंत किए जाने वाले जरूरी कदम
यदि घर में किसी की मृत्यु हुई है और उनके नेत्रदान की इच्छा को पूरा करना है, तो ये कदम उठाएं:
- निकटतम आई बैंक (Eye Bank) से संपर्क करे ।
- आंखें बंद रखें: दिवंगत व्यक्ति की पलकें धीरे से बंद कर दें और उन पर गीली रुई रख दें।
- पंखे बंद कर दें: कमरे का पंखा बंद कर दें और यदि संभव हो तो ए.सी. (A.C.) चला दें।
- सिर को ऊंचा रखें: सिर के नीचे एक तकिया लगा दें ताकि सिर का हिस्सा थोड़ा ऊंचा रहे।

