एसएसपी रजनेश सिंह की आम जनता से अपील…डिजिटल अरेस्ट का झांसा…!
डरे नही सतर्कता जरूरी…अनजान नंबरों से वीडियो कॉल रिसीव करने से बचें मदद के लिए संपर्क करें साइबर हेल्पलाइन: 1930 वेबसाइट: www.cybercrime.gov.in
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़]
देशभर में तेजी से फैल रही साइबर ठगी की नई चाल डिजिटल अरेस्ट अब आम नागरिकों के लिए बड़ा खतरा बन चुकी है। बिलासपुर में सामने आए एक गंभीर मामले ने इस खतरे को और स्पष्ट कर दिया है, जहां 82 वर्षीय एक वरिष्ठ महिला को डराकर साइबर ठगों ने ₹1,04,80,000 की भारी रकम ठग ली।
इस घटना ने न सिर्फ स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे देश में जागरूकता की आवश्यकता को रेखांकित किया है। हालांकि, बिलासपुर पुलिस की सतर्कता और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की सक्रिय कार्यशैली से साइबर अपराधियों में डर का माहौल भी बना हुआ है।
कैसे रचा गया डिजिटल अरेस्ट का जाल?
घटना 20 अप्रैल 2026 की है, जब महिला को WhatsApp के जरिए कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई पुलिस का PSI बताते हुए महिला को टेरर फंडिंग केस” में फंसाने की धमकी दी।
इसके बाद वीडियो कॉल पर नकली पुलिस और क्राइम ब्रांच का माहौल तैयार कर महिला को डिजिटल अरेस्ट में होने का डर दिखाया गया। ठगों ने महिला को यह भी कहा कि उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है और किसी को जानकारी देने पर तुरंत गिरफ्तारी होगी।
डर और मानसिक दबाव में आकर महिला ने अपने बैंक खातों, एफडी और अन्य बचत की जानकारी साझा कर दी।
जांच के नाम पर ठगी का खेल
ठगों ने खुद को जांच एजेंसी बताते हुए महिला को कथित सरकारी/आरबीआई खाते में पैसे ट्रांसफर करने को कहा। भरोसा दिलाया गया कि जांच पूरी होने पर पूरी राशि वापस कर दी जाएगी।
लगातार फर्जी दस्तावेज और नोटिस भेजकर महिला को भ्रमित किया गया और अलग-अलग दिनों में कुल ₹1.04 करोड़ से अधिक की रकम ट्रांसफर करवा ली गई।
जब ठगों ने और 50 लाख की मांग की, तब परिवार को शक हुआ और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
क्या है डिजिटल अरेस्ट…?
डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगों की एक पूरी तरह फर्जी और गैर-कानूनी चाल है, जिसमें वे पुलिस, CBI या ED अधिकारी बनकर लोगों को डराते हैं और उनसे पैसे ऐंठते हैं।

पुलिस की स्पष्ट चेतावनी
बिलासपुर पुलिस ने नागरिकों को स्पष्ट किया है कि: फोन या वीडियो कॉल पर कोई गिरफ्तारी नहीं होती
कोई भी एजेंसी पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहती WhatsApp पर वारंट या नोटिस जारी नहीं किए जाते
OTP या बैंक डिटेल्स कभी साझा न करें
एसएसपी की सख्ती से बढ़ा भरोसा
बिलासपुर एसएसपी के नेतृत्व में साइबर अपराधों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। साइबर सेल की सक्रियता से कई मामलों में आरोपियों तक पहुंच बनाई गई है, जिससे अपराधियों में हड़कंप मचा हुआ है।
पुलिस का कहना है कि जागरूकता और त्वरित सूचना ही ऐसे अपराधों से बचने का सबसे बड़ा हथियार है।
कैसे रहें सुरक्षित..?
ऐसे कॉल या वीडियो कॉल से घबराएं नहीं
तुरंत कॉल काट दें…
किसी भी स्थिति में पैसे ट्रांसफर न करें
परिवार या पुलिस को तुरंत जानकारी दें
अनजान नंबरों से वीडियो कॉल रिसीव करने से बचें मदद के लिए संपर्क करें
साइबर हेल्पलाइन: 1930
वेबसाइट: www.cybercrime.gov.in
निष्कर्ष:
डिजिटल अरेस्ट एक झूठा जाल है, लेकिन इसका डर असली होता है।
सतर्कता, जागरूकता और समय पर कार्रवाई ही इस तरह की साइबर ठगी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।

