09-मई,2021
अमरकंटक-{जनहित न्यूज़}
पूंजीपतियों और रशूखदारों के समक्ष सरकार व प्रशासन दोनों ने टेके घुटने, सरकार व प्रशासन की नाकामी का दंश झेल रही आम जनता, कोरोनाकाल में आम जनता दो से तीन गुनी कीमतों पर सामान खरीदने को मजबूर, प्रदेश स्तरीय कालाबाज़ारी के इस काले खेल के वास्तविक खिलाड़ी कौन? कहीं पर्दे के पीछे से खेले जा रहे इस खेल में जिम्मेदारों की मौन सहमति तो नहीं?
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव श्रीधर शर्मा कहा की अनूपपुर जिले ही नहीं अपितु समूचे प्रदेश में खाद्य पदार्थों, आवश्यक दवाइयों और राजश्री व अन्य पान मसाला का व्यापार करने वाले फुटकर विक्रेता ग्राहकों के समक्ष निरंतर बढ़े हुए दामों पर सामान बेंच रहे हैं या यूं कहें कि बढ़े हुए दामों पर सामान बेंचने को मजबूर हैं क्योंकि इन फुटकर विक्रेताओं को ही बढ़े हुए दामों पर सामान उपलब्ध हो पा रहे हैं और इस मंहगाई की जड़ें बहुत गहरी हैं क्योंकि प्रदेश स्तर के बड़े बड़े डीलर व बड़े स्टॉकिस्ट कंपनी से आने वाले सामान की कालाबाज़ारी करते हैं और बड़े पैमाने पर सामान को स्टॉक कर बाजार में उस सामान की कमी बताकर उसे बढ़े हुए दाम पर फुटकर विक्रेताओं को उपलब्ध कराते हैं और ग्राहकों को इस कोरोनाकाल में दो से तीन गुनी कीमत पर बस्तुएं खरीदनी पड़ती हैं। आज बाजारों की दशा ऐसी है कि दुकानें बंद हैं और प्रदेश भर में जिले की स्थिति के अनुसार कलेक्टर के आदेशानुसार नियम पारित किए गए हैं। अब यदि अनूपपुर जिले की बात करें तो कई जगह बाजार को पूरा बंद कर होम डिलीवरी के माध्यम से लोगों को सामान उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है, इन परिस्थितियों में लोगों को सामान की गुणवत्ता से लेकर उनकी कीमतों तक सभी मे समझौता करना पड़ रहा है। यदि किसी प्रकार के विरोध की स्थिति बनती है तो अगली बार कोई दुकानदार घर पहुंच सेवा नहीं देगा, इसलिए जो भी उपलब्ध हो जाए, आम जनता उसी में संतुष्ट रहने को मजबूर है। लॉक डाउन का फायदा उठाकर बड़े व्यापारी तत्काल सामान जाम कर देते हैं और फिर मौके का फायदा उठाकर मनमाने दाम पर फुटकर विक्रेताओं को उपलब्ध कराते हैं, जिससे कि बाजार में उन वस्तुओं की कीमत दो गुनी या उससे भी अधिक होती है। लगातार समाचार पत्रों व चैनलों में खबरों के प्रकाशन व सोशल मीडिया में लगातार सूचना प्रसारित होने के कारण प्रशासन हरकत में आता है और कार्यवाही भी करता है लेकिन चंद दिनों के बाद फिर वही कहानी शुरू हो जाती है। इस कोरोनाकाल मे एक ओर लोगों के आय के साधन पूर्णतया बंद हैं, कितने परिवार आज भूखों मरने की कगार पर खड़े हैं, कितने ऐसे परिवार हैं, जिनके पास रोजगार नहीं हैं और इस आपदा के समय ये बड़े व्यापारी कुछ बड़े नेताओं और रशूखदारों की चमचागिरी कर पूरे देश व प्रदेश की जनता के लिए नासूर बन बैठे हैं और आपदा में संपदा बनाने में मशगूल हैं। जिस समय आम जनता को सभी नेताओं और इन दौलतमंदों के सहयोग व सहानुभूति की आवश्यकता है, आज उसी आपदा के समय ये मौके भुनाने में लगे हुए हैं और सबसे सोचनीय बात तो यह है कि अब तक सरकार इस बड़े पैमाने पर हो रही कालाबाज़ारी को रोकने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं कर रही है और न तो दोषियों के विरुद्ध कोई विशेष कार्यवाही हो पा रही है। यही कारण है कि आम जनता आज कुछ चंद लोगों के भरते भंडार की कीमत अपने व अपने परिजनों के भूख की आहुति देकर चुकाने को मजबूर है और हमारी सरकार प्रशासन व अन्य रशूखदार तमाशबीन बने बैठे हुए हैं। क्या ये कालाबाज़ारी के जनक हमारी सरकार व प्रशासन से भी बड़े हो गए हैं? क्या सरकार व प्रशासन कि नज़र में आम जनता की भूख से ज्यादा कीमती हो गई है इन कालाबाज़ारी करने वालों की चमचागीरी? क्या प्रदेश की आम जनता को अपने कीमती वोटों की कीमत इसी प्रकार से चुकानी पड़ेगी?

